दून में सरकारी जमीन पर बनी मजार (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में देवभूमि उत्तराखंड में अतिक्रमण और “लैंड जिहाद” के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश की राजधानी देहरादून में सरकारी जमीन कब्जाने का मामला सामने आया है। दरअसल, फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) रेंजर्स कॉलोनी स्थित एक मजार को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए है।
जानकारी के अनुसार, देहरादून के कॉन्वेंट रोड स्थित इस मजार को पहले वक्फ रिकॉर्ड में ‘UK DD 0334’ के नाम से दर्ज किया गया था, लेकिन अब ‘उम्मीद’ पोर्टल पर दस्तावेजी सत्यापन के दौरान इसके पास जमीन से जुड़े कोई वैध कागजात नहीं मिले हैं। मजार को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी सामने आई हैं।
दरअसल, प्रत्येक गुरुवार को यहाँ भारी भीड़ जुटती है। आरोप है, कि यहाँ ताबीज और झाड़-फूँक के नाम पर लोगों से पैसे वसूले जाते हैं। वहीं केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों को दस्तावेजों के साथ ‘उम्मीद’ पोर्टल पर दर्ज कराने की समय-सीमा बढ़ाई थी, लेकिन कई संपत्तियाँ जरूरी मालिकाना दस्तावेज न होने के कारण दर्ज नहीं हो सकी।
जाँच में यह भी सामने आया है, कि कुछ संपत्तियाँ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के बाद वक्फ रिकॉर्ड में शामिल कर दी गई थी। देहरादून की यह मजार वन विभाग की सरकारी भूमि पर बनी है। जिस सैयद जमाल शाह के नाम पर यह मजार बनाई गई है उनके नाम से अन्य जगहों पर फ्रेंचाइजी मजारें होने के कारण वास्तविक दफन स्थल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज न मिलने के बाद जिला प्रशासन अब इस निर्माण पर नोटिस देने की तैयारी में है। गौरतलब है, कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार पिछले कुछ समय से सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों और अतिक्रमणों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है।
आंकड़ों के अनुसार, अभी तक प्रदेशभर में 588 से अधिक अवैध मजारों और अन्य अवैध संरचनाओं को सरकारी भूमि से हटाया जा चुका है। हाल ही में सीएम धामी ने सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर अतिक्रमण विरोधी अभियान को और तेज गति से संचालित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभिन्न जिलों में प्रशासनिक कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
