नकली नोट छापने वाले गिरोह के दो सदस्य पंजाब से गिरफ्तार,(फोटो साभार: X@haridwarpolice)
हरिद्वार पुलिस ने नकली नोट तैयार कर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड सुखबीर और उसके दोस्त पवन को पंजाब से गिरफ्तार किया है। बता दें, कि पुलिस ने पूर्व में गिरोह में शामिल चार आरोपितों को हरिद्वार में नकली नोट चलाते हुए गिरफ्तार किया था। अब तक इस मामले 6 गिरफ्तारियां हो चुकी है।
मायापुर स्थित एसपी सिटी कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान एसपी सिटी अभय सिंह ने पूरे मामले का खुलासा किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 32 वर्षीय पवन कुमार निवासी थाना कोटली सूरत मल्ली, जिला गुरदासपुर और 52 वर्षीय सुखबीर सिंह थाना तरसिक्का, जिला अमृतसर पंजाब के रूप में हुई है।
एसपी सिटी के अनुसार, बीते दिनों 6 जुलाई को नगर कोतवाली पुलिस ने सरजीत सिंह, टिंकू, सुमित कुमार और संजीव कुमार को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के कब्जे से कुल 84 हजार के 500-500 रुपए के नकली नोट बरामद हुए थे। चारों हरिद्वार में नकली नोट चलाने आए थे और करीब दस हजार रुपए चला भी चुके थे।
जेल में दोस्ती कर बनायी नक़ली नोट बनाने की योजना
👊 SSP नवनीत सिंह की अनुभवी लीडरशिप में एक और बड़ी कामयाबी, जाली करेंसी गैंग की जड़ तक पहुंची पुलिस।
🔍 कस्टडी रिमाण्ड का सटीक इस्तेमाल, पंजाब तक पहुंची जांच और बेनकाब हुआ फेक करेंसी नेटवर्क#SafeHaridwar #ZeroToleranceToCrime pic.twitter.com/ZUvnTr8NrG
— Haridwar Police Uttarakhand (@haridwarpolice) July 12, 2026
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने टिंकू और सुमित को रिमांड में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में गिरोह के अन्य दो सदस्यों के नाम सामने आये। आरोपियों द्वारा बताए गए नाम-पते के आधार पर पुलिस टीम पंजाब पहुंची। टीम ने पंजाब में पवन और सुखबिर सिंह को 1 लाख रुपए के रुपये नकली नोटों के साथ पठानकोट हाईवे से गिरफ्तार किया।
पूछताछ में सामने आया, कि आरोपी पवन पेशे से ढाबा संचालक है, जो ढाबे की आड़ में नकली नोट का धंधा करता था। जबकि सुखबीर कपड़ों के बिजनेस की आड़ में नकली नोट का धंधा करता था। इनके द्वारा असली 50 हजार रुपये के बदले 1 लाख रुपए नकली नोट देकर मुनाफा कमाया जाना संज्ञान में आया है।
पुलिस के मुताबिक, सुखबीर वर्ष 2020 में बैंक धोखाधड़ी और वर्ष 2024 में जाली करेंसी के मामले में जेल जा चुका है, जबकि पवन वर्ष 2022 में एनडीपीएस एक्ट में जेल गया था। जेल में दोनों की दोस्ती हुई और इन्होंने नकली नोट बनाकर मोटा मुनाफा कमाने की योजना बनाई।
दोनों आरोपी अच्छे गुणवत्ता के कागज मंगाते थे और प्रिंटर से नकली नोट छापते थे। जांच में आमने आया, कि आरोपी नोट छापने के बाद उन्हें धूप और धूल-मिट्टी में रखते थे, ताकि मार्केट में कोई नकली नोटों को पहचान न सके।
