सांकेतिक चित्र, (फोटो साभार: canva.com)
चंपावत जिले में नाबालिग लड़़की के साथ हुए कथित गैंगरेप मामले में अब नया मोड़ आ गया है। दरअसल, पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए है। पुलिस के मुताबिक, जब मामले की गहनता से जांच की गई, तो बदले की भावना से नाबालिग को बहला-फुसलाकर सुनियोजित षड्यंत्र रचने की बात सामने आई है।
बता दें, कि बुधवार 6 मई 2026 को पीड़िता के पिता द्वारा एक लिखित तहरीर प्रस्तुत कर अवगत कराया गया, कि मंगलवार 5 मई की रात्रि उसकी 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री के साथ तीन व्यक्तियों द्वारा दुष्कर्म किया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्राप्त तहरीर के आधार पर कोतवाली चंपावत में पोक्सो एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी चंपावत रेखा यादव द्वारा तत्काल क्षेत्राधिकारी चंपावत के पर्यवेक्षण में 10 सदस्यीय एसआईटी का गठन कर निष्पक्ष एवं गहन विवेचना करने के निर्देश दिए गए। एसपी द्वारा स्वयं पीड़िता से बातचीत कर और घटनास्थल पर जाकर स्थानीय लोगों से वार्ता कर घटना की जानकारी ली गई।
चंपावत के कथित दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस की जांच में साजिश के खुलासे की जानकारी देतीं पुलिस अधीक्षक श्रीमती रेखा यादव।#Champawat#Uttarakhand pic.twitter.com/VuyD6JRPtX
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) May 7, 2026
SIT द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्यों को संरक्षित किया गया तथा RFSL ऊधमसिंह नगर की फील्ड यूनिट को मौके पर बुलाकर वैज्ञानिक तरीके से घटनास्थल का परीक्षण कराया गया। साथ ही पीड़िता का तत्काल मेडिकल परीक्षण, CWC के समक्ष काउंसलिंग एवं न्यायालय के समक्ष बयान दर्ज कराए गए।
पीड़िता की देख-रेख एवं सुरक्षा हेतु जिलाधिकारी से पत्राचार कर एक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। एसआईटी की विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आये, कि पीड़िता ग्राम सल्ली में विवाह समारोह में अपनी इच्छा से अपने दोस्त के साथ गई थी। घटना के दिन पीड़िता का विभिन्न स्थानों पर आवागमन एवं गतिविधियां सीसीटीवी फुटेज और सीडीआर से सत्यापित हुई हैं।
इसके अलावा मेडिकल परीक्षण में किसी प्रकार की बाहरी अथवा आंतरिक चोट, संघर्ष अथवा जबरदस्ती के स्पष्ट चिकित्सीय संकेत प्राप्त नहीं हुए हैं। वहीं कुछ गवाहों के बयान तकनीकी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल खाते नहीं पाए गए, जिससे घटनाक्रम की सत्यता प्रमाणित नहीं होती है।
SIT की जांच के दौरान कमल रावत, पीड़िता एवं पीड़िता की महिला मित्र के मध्य घटना तिथि पर असामान्य रूप से बार-बार संपर्क और बातचीत होना पाया गया, जो प्रकरण के घटनाक्रम के संबंध में महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करता है। वहीं घटना के दौरान नामजद व्यक्तियों विनोद रावत, नवीन रावत और पूरन रावत की मौजूदगी घटनास्थल पर नहीं पाई गई।
इसके अलावा गवाहों के बयानों व तकनीकी साक्ष्यों से भी इस बात की पुष्टि हुई है, कि घटना के दौरान नामजद व्यक्ति मौके पर नहीं थे। जांच के दौरान पता चला, कि कमल रावत द्वारा बदले की भावना से प्रेरित होकर एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत नाबालिग बालिका को झूठा प्रलोभन व बहला-फुसलाकर अपने बदले की पूर्ति हेतु षडयंत्र रचा गया था।
प्रकरण के संबंध में चंपावत एसपी द्वारा बताया गया, कि विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा प्रत्येक तथ्य का वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष परीक्षण किया गया है। मामले में किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित न किया जाए तथा दोषी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित हो, इस उद्देश्य से सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच जारी है।
उन्होंने बताया, कि वर्तमान में डिजिटल एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण प्रगति पर है। संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ एवं अन्य साक्ष्यों का संकलन जारी है। यदि जांच के दौरान तथ्यों को भ्रामक अथवा मनगढ़ंत पाया जाता है, तो विधि अनुसार सुसंगत धाराओं में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
एसपी चंपावत रेखा यादव ने कहा, कि उत्तराखंड पुलिस द्वारा महिला एवं बाल अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाती है। साथ ही किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना अथवा झूठे आरोपों को भी गंभीरता से लेते हुए विधिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम जनमानस एवं मीडिया बंधुओं से अनुरोध किया है, कि प्रकरण की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए केवल सत्यापित तथ्यों का ही प्रकाशन करें।
इस बीच पुलिस द्वारा कथित सामूहिक दुष्कर्म में शामिल तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद अब उनके परिजन भी मीडिया के सामने आकर बयान दे रहे हैं और इस पूरी घटना को राजनीतिक साजिश बता रहे है। एक आरोपी की बेटी ने अपने पिता को बेकसूर बताया है। वहीं आरोपी की पत्नी का कहना है, कि उनके पति को राजनीतिक और सामाजिक प्रतिशोध के तहत फंसाया जा रहा है।
