(फोटो साभार: NDTV)
पंचकूला सेक्टर-20 के स्कूल में तीसरी कक्षा के छात्र द्वारा पहली कक्षा की छह वर्षीय बच्ची पर ईंट से करीब 12 वार करने की घटना ने बच्चों में बढ़ती आक्रामकता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। गंभीर रूप से घायल बच्ची का पीजीआई में उपचार चल रहा है। राहत की बात यह है, कि घटना के करीब दो दिन बाद घायल बच्ची ने परिजनों से बातचीत की।
पुलिस जांच में शुरुआती तौर पर स्कूल प्रशासन की लापरवाही भी सामने आई है। इसके बाद स्कूल प्रशासन के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई है। वहीं, जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी ने दो शिक्षकों सिमरनजीत कौर और पूजा रानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
Panchkula school assault case: Two JBT teachers suspended, child rights panel seeks report
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— ANI Digital (@ani_digital) November 1, 2026
बताया जा रहा है, कि स्कूल के प्रधानाचार्य पर कार्रवाई के लिए शिक्षा निदेशक जितेंद्र दहिया को पत्र भेजा गया है। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के निर्देश पर दो कमेटियां गठित की गई हैं। शिक्षा विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी 24 घंटे के भीतर व जिला प्रशासन की पांच सदस्यीय कमेटी सात दिन में रिपोर्ट देगी।
बता दें, कि 28 अक्तूबर की दोपहर को हुई इस घटना का सवा तीन मिनट का फुटेज वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है, कि आठ वर्षीय छात्र पहले बच्ची का सिर बेंच पर पटकता है। इसके बाद लात-घूंसों से हमला करता है। इस बीच में कई बार बाल पकड़कर घसीटता भी है। फिर ईंट और डस्टबीन से कई बार प्रहार करता है।
इस हमले में बच्ची अचेत हो जाती है, फिर भी आरोपी छात्र उस पर हमला करता रहता है। घटना का पता तब चला, जब छुट्टी के बाद जब ऑटो चालक को बच्ची नहीं मिली, तो उसने पिता को सूचना दी। पिता के स्कूल पहुंचने पर आरोपी बच्चे ने ही बताया कि बच्ची पहली मंजिल के कमरे में घायल पड़ी है, फिर परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे।
बताया जा रहा है, कि आठ वर्षीय छात्र के हमले के बाद छह वर्षीय बच्ची पहली मंजिल के कमरे में खून से लथपथ पड़ी रही, लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। आरोप है, कि स्कूल बंद करते समय चौकीदार ने कमरे के अंदर बच्ची के होने की जांच तक नहीं की। दरवाजे की कुंडी लगी देखकर बाहर से ताला लगाया और चला गया।
बच्ची पर हुए हमले के बाद अब छात्र के व्यवहार, दिनचर्या और पारिवारिक माहौल से जुड़े पहलुओं की पड़ताल हो रही है। सामने आया है कि बच्चा मोबाइल पर फ्री फायर गेम खेलने का शौकीन था लेकिन करीब डेढ़ महीने पहले परिजनों ने उसे मोबाइल देना बंद कर दिया था।
पुलिस उसकी मानसिक स्थिति का आकलन कराने के लिए मनोचिकित्सक की राय ले रही है। फिलहाल मोबाइल गेम खेलने और इस घटना के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
इस पूरे मामले में हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग की चेयरपर्सन ने बच्ची के परिजनों से मुलाकात कर शिक्षा विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही आयोग ने नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी है, कि मामले में अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई है।
