मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को माना मंदिर,(फोटो साभार: X@thecaravanindia)
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा निर्णय सुनाया है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘यह परिसर हिंदू मंदिर है।’ कोर्ट ने कहा, कि भोजशाला के अंदर अब रोजाना पूजा होगी और वहां अब कोई नमाज अदा नहीं होगी। बताया जा रहा है, कि अब मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, कि भोजशाला का मूल स्वरूप संस्कृत शिक्षा केंद्र का था। अदालत ने ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन पर भरोसा जताते हुए कहा, कि पुरातत्व एक विज्ञान है और कोर्ट वैज्ञानिक निष्कर्षों पर भरोसा कर सकती है। कोर्ट ने कहा, कि सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है, कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण करे।
धार की भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया, कि भोजशाला एक संरक्षित स्मारक (Protected Monument) है और इसे वाग्देवी का मंदिर माना जाएगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, कि भोजशाला का प्रबंधन और नियंत्रण अब पूरी तरह ASI के पास रहेगा। साथ ही हिंदू समाज को यहां पूजा-अर्चना करने का अधिकार दिया गया है।
#WATCH | Dhar, Madhya Pradesh | On Dhar-Bhojshala case, advocate Vishnu Shankar Jain says, "The Indore High Court has delivered a historic verdict, partially setting aside the ASI's order dated April 7, 2003. Furthermore, the Court has granted the Hindu side the right to worship… pic.twitter.com/gilTokeGJy
— ANI (@ANI) May 15, 2026
वहीं हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा है, कि वो मस्जिद बनाने के लिए दूसरी जगह की माँग कर सकते हैं, लेकिन धार की भोजशाला कमाल मौला मस्जिद (जैसा दावा करते हैं) नहीं बल्कि मूल रूप से वाग्देवी का मंदिर है। अब इस जगह पर नमाज नहीं होगी। अभी तक शुक्रवार को ASI के पुराने आदेश के तहत नमाज पढ़ी जाती थी, लेकिन अब सभी पुराने आदेश रद्द हो गए हैं।
बता दें, कि हिंदू पक्ष द्वारा हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर भोजशाला को मंदिर घोषित करने तथा हिंदू समाज को वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की गई थी। इस मामले को लेकर पिछले चार साल से सुनवाई चल रही थी। लंबी न्यायिक प्रक्रिया और बहस पूरी होने के बाद अब हाई कोर्ट ने धार भोजशाला को मंदिर करार दिया है।
उल्लेखनीय है, कि विवाद में मां वाग्देवी की प्रतिमा का मुद्दा भी प्रमुख रहा है। रिकार्ड के अनुसार 1875 में खुदाई के दौरान प्रतिमा मिलने का उल्लेख है। बाद में ब्रिटिश अधिकारी इसे इंग्लैंड ले गए। हिंदू संगठनों ने कई बार प्रतिमा को वापस भारत लाने की मांग उठाई। अब हाई कोर्ट ने भी कह दिया है, कि सरकार इंग्लैंड से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रयास करे।
दरअसल, पूरे देश की निगाहें इस फैसले पर टिकी हुई थी, क्योंकि यह विवाद केवल मंदिर और मस्जिद तक सीमित नहीं रहा था, बल्कि यह भारतीय इतिहास, पुरातत्व, आस्था, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका था। हालाँकि अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद हिंदुओं को बड़ी राहत मिली है।
