सांकेतिक चित्र
उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स ने नैनीताल निवासी एक ऐसे किशोर को पकड़ा है। जो स्वयं बच्चों के साथ अश्लील कृत्य करते हुए वीडियोग्राफी बना रहा था और इसे डार्क वेब पर बेच रहा था। नाबालिग पर इंटरनेट से आपत्तिजनक सामग्री डाउनलोड कर AI तकनीक से एडिट करने और नया कंटेंट बनाकर डार्क वेब पर बेचने के आरोप है।
एसटीएफ के आईजी डॉ. नीलेश भरणे ने गुरुवार को प्रेस वार्ता के दौरान में खुलासा किया, कि STF ने इंटरनेट के छिपे नेटवर्क डार्क वेब पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो भेजने के मामले में कार्रवाई कार्रवाई करते हुए नैनीताल निवासी एक किशोर को पकड़ा है। उसके मोबाइल और लैपटॉप की जांच में 100 वीडियो बरामद हुए है।
उन्होंने बताया, कि इन वीडियो में कुछ में उसने एआई तकनीक से बदलाव किए हैं। जबकि, कई वीडियो में वह खुद भी बच्चों के साथ नजर आ रहा है। एसटीएफ पुलिस महानिरीक्षक के मुताबिक, किशोर डार्क वेब पर मांग के हिसाब से वीडियो बनाकर भेजता था।
आईजी एसटीएफ डॉ. नीलेश आनंद भरणे ने बताया, कि वर्ष 2026 में अब तक प्राप्त चाइल्ड पोर्नोग्राफी सूचनाओं के आधार पर प्रदेश में लगभग 150 मुकदमें दर्ज किये जा चुके है। इनमें से पांच मुकदमें हल्द्वानी में दर्ज हैं।
उन्होंने बताया, कि STF और साइबर पुलिस द्वारा इन मुकदमों की विवेचना के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए जो बेहद चौंकाने वाले थे। इसमें नैनीताल निवासी एक किशोर के बच्चों की अश्लील वीडियो के धंधे में लिप्त होने के संकेत मिल रहे थे। इस आधार पर जांच तेज की गई और बुधवार को उसे पकड़ लिया गया।
उन्होंने बताया, कि नाबालिग के लैपटॉप और मोबाइल से 100 से ज्यादा बच्चों की वीडियो मिली है। इसके अलावा कुछ डिलीट की गई फाइलों को भी रिट्रीव किया गया है। ये सभी बच्चों की अश्लील वीडियो से संबंधित थी। किशोर से जब पूछताछ की गई, तो पता चला, कि वह डार्क वेब पर काम करता है।
नाबालिग ने बताया, कि वह डार्क वेब पर मांग के मुताबिक अपने साथ के बच्चों की वीडियो बनाकर अपलोड करता था। इसके बदले उसे अच्छी खासी रकम भी मिलती थी। आईजी ने बताया, कि मामले में जांच चल रही है। उसके कुछ और स्थानीय साथियों के भी इस धंधे में लिप्त होने की संभावना है।
उन्होंने बताया, कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एसटीएफ को विवेचना करने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है, कि बच्चों के ऑनलाइन यौन उत्पीड़न और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों के विरुद्ध गृह मंत्रालय ने कड़े कानून बनाए हैं, फिर भी इस प्रकार मामले लगातार सामने आ रहे है।
वहीं पुलिस ने आमजन से अपील की है, कि अभिभावक बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति सजग रहे तथा बाल यौन शोषण संबंधी अवैध सामग्री को डाउनलोड, संग्रहित और शेयर ना करें, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें।
