सांकेतिक चित्र AI (फोटो साभार: freepik.com)
हरिद्वार में संचालित हो रहे मदरसों की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दरअसल, जिले में स्थित मदरसों में बच्चों की बढ़ी हुई संख्या दिखाकर सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठाने का गंभीर प्रकरण सामने आया है। जब जिला प्रशासन द्वारा मामले की जांच की गई, तो अचानक मदरसों में तालीम लेने वाले लगभग 12 हजार बच्चे गायब मिले।
जानकारी के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की गिरावट के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वर्तमान में 31 हजार में से 19,000 बच्चे ही मदरसों में पढ़ रहे है। हरिद्वार जिले में संचालित मदरसों में छात्रों की संख्या में आई गिरावट के बाद जिलाधिकारी ने प्रकरण की जांच के लिए एसडीएम की अध्यक्षता में 4 सदस्यों की कमेटी का गठन किया है।
जिलाधिकारी द्वारा गठित कमेटी में एसडीएम के अलावा जिला शिक्षा अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शामिल है। बता दें, कि डीएम के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने लक्सर तहसील क्षेत्र में मदरसों की जांच की थी। जांच के बाद 131 मदरसों में से 23 मदरसों में अनियमितताएं पाए जाने पर मिड डे मील और अन्य फंड पर रोक लगा दी गई थी।
जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक अमित कुमार चंद का कहना है, कि सत्र बदलने पर हर साल छात्रों की संख्या में गिरावट देखी जाती है, जो जुलाई महीने में जाकर सामान्य होती है। उन्होंने बताया, कि 131 मदरसों की जांच की गई थी, जिसमें से 23 मदरसों में गड़बड़ी पाए जाने पर पीएम पोषण योजना पर रोक लगा दी गई थी।
गौरतलब है, कि 23 में से 11 मदरसा संचालकों ने खुद ही मिड डे मील बंद करने का आवेदन किया था। जांच के बाद मार्च और अप्रैल के आंकड़ों में सभी मदरसों में दस से बारह हजार बच्चों की संख्या कम हो गई है। इसी क्रम में नए शैक्षिक सत्र में बच्चों की संख्या बढ़ भी सकती है। फिलहाल जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित कमेटी इस मामले में अग्रिम जांच करेगी।
