ग्लेशियर झीलों के खतरे से निबटने के लिए लगेंगे अर्ली वार्निंग सिस्टम, (चित्र साभार: X@DIPR_UK)
नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने ग्लेशियर झीलों से जुड़े संभावित खतरों को लेकर तैयारियां तेज कर दी है। इसी क्रम में राज्य की 13 संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की निगरानी मजबूत करने के साथ अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों के मद्देनजर राज्य सरकार द्वारा उनकी निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही जरूरत के अनुसार सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण और संचार व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्लेशियर झीलों की नियमित एवं वैज्ञानिक निगरानी के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने तथा आवश्यकतानुसार इनकी संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
Uttarakhand | In view of the potential threats posed by glacier lakes in Uttarakhand’s mountainous regions, the state government will further strengthen their monitoring and safety mechanisms. Chief Minister Pushkar Singh Dhami has directed authorities to ensure regular and… pic.twitter.com/et9jNNNVoH
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) August 27, 2026
सीएम धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन को निर्देश दिए है, कि प्रदेश में स्थित संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक सर्वे एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। झीलों की स्थिति, जलस्तर, आकार में होने वाले परिवर्तन, आसपास के भू-भाग की स्थिति तथा संभावित जोखिम क्षेत्रों का नियमित आकलन किया जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं, कि केवल अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने तक सीमित न रहते हुए ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षात्मक एवं जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर कार्य किया जाए। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां आपदा की स्थिति में सुरक्षित निकासी मार्ग, संभावित प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन, संचार व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर चेतावनी तंत्र तथा राहत एवं बचाव की तैयारियों को मजबूत किया जाए।
सीएम धामी के निर्देश पर उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग विनय रुहेला तथा ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) द्वारा नेपाल में घटित आपदा के उपरांत उत्तराखंड में ऐसी संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को लेकर सभी जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा की गई।
इसी क्रम में जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए, कि अपने-अपने जनपदों में संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें तथा किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तत्काल उच्च स्तर पर उपलब्ध कराई जाए।
उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया, कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों से काफी हद तक मिलती-जुलती हैं। ऐसे में नेपाल में घटित आपदा से सीख लेते हुए उत्तराखंड में संभावित जोखिमों को लेकर पहले से तैयारी करना आवश्यक है।
ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) ने कहा, कि प्रत्येक आपदा अपने साथ महत्वपूर्ण सीख लेकर आती है। आपदा के समय सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्थानीय स्तर पर मौजूद लोगों और प्रशासन की होती है। उन्होंने कहा, कि ग्राम प्रधानों एवं स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ मजबूत एवं त्वरित संचार नेटवर्क स्थापित किया जाना जरूरी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में चेतावनी और आवश्यक सूचना सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र के लोगों तक पहुंच सके।
उन्होंने कहा, कि उत्तराखंड में कुल 13 ग्लेशियर झीलें संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित की गई हैं। इनमें से चार ग्लेशियर झीलों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। शेष संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा।
उन्होंने बताया, कि जल्द ही चमोली जनपद स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल का सर्वेक्षण करने के लिए विशेषज्ञ दल रवाना किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, संभावित खतरे के कारकों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पड़ने वाले संभावित प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा।