ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज ने बनाई हर्बल बीड़ी, (फोटो साभार: etvbharat)
हर साल लगभग 10 लाख लोगों की स्मोकिंग की वजह से मौत होती है। इसके जोखिमों को स्वीकार करते हुए भी लोग आसानी से स्मोकिंग की लत से छुटकारा नहीं पा पाते। हालांकि धूम्रपान की लत से परेशान लोगों के लिए ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज के अंगदतंत्र विभाग ने एक नई पहल की है।
ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, आयुर्वेदाचार्यों और शोधार्थियों ने निकोटीन मुक्त औषधीय धूम्रपान दंडिका यानी हर्बल बीड़ी तैयार की है। शोधार्थियों के अनुसार, धूम्रपान की लत से मुक्ति के लिए आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक शोध को साथ लेकर काम किया जा रहा है।
ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज के शोधार्थियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक तलब को कम करते हुए धीरे- धीरे तंबाकू और निकोटीन से दूरी बनाने में सहायता करना है। हर्बल बीड़ी में तंबाकू की जगह तेंदु के पत्ते के अंदर शलकी, लाक्षा और मधुयेष्ठी जैसी 15 आयुर्वेदिक दवाएं भरी गईं है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज के अंगदतंत्र विभाग के विशेषज्ञों ने प्राचीन आयुर्वेद के आचार्यों जैसे चरक, सुश्रुत और वागभट्ट के बताए गए आयुर्वेदिक सिद्धांतों के आधार पर इस हर्बल बीड़ी को तैयार किया है। इसमें तंबाकू और निकोटीन का इस्तेमाल नहीं किया गया है। आर्युवेद में इसे धूमपान विधि कहा जाता है।
ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज, हरिद्वार में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर तैनात डॉ भावना मित्तल ने बताया, कि धूम्रपान छोड़ना कई लोगों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इसी को केंद्र में रखते हुए आयुर्वेदिक औषधियों से यह धूमपान दंडिका यानी हर्बल स्मोकिंग स्टिक तैयार की गई है। इसका इस्तेमाल चिकित्सकीय निगरानी में कराया जा रहा है।
वहीं जानकारी मिलने पर धूम्रपान करने वाले लोग ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज पहुंच रहे हैं और चिकित्सकों की निगरानी में आयुर्वेदिक विधि से उपचार करा रहे हैं। अपना इलाज करा रहे स्थानीय निवासी ने बताया, कि मैं पिछले 40 सालों से धूम्रपान की आदत से परेशान था। हर्बल बीड़ी के इस्तेमाल के बाद मुझे स्मोकिंग की इच्छा में कमी महसूस हुई है।
स्थानीय निवासी ने बताया, कि उन्होंने धूम्रपान छोड़ने की कई बार कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। हर्बल दंडिका के इस्तेमाल से उन्हें तंबाकू से दूरी बनाने में मदद मिल रही है। उनका कहना है, कि अगर यह प्रयोग प्रभावी रहा, तो धूम्रपान छोड़ने का प्रयास कर रहे लोगों के लिए यह बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
