सांकेतिक चित्र
अफ्रीका में इबोला वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। वहीं, भारत सरकार द्वारा भी कांगो, युगांडा और साउथ सूडान की यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी इस वायरस को महाद्वीपीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक्स पोस्ट के मुताबिक, अफ्रीका में फैल रहे इबोला वायरस का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। इसी क्रम में भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी कर भारतीय नागरिकों को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और साउथ सूडान की गैर-जरूरी यात्रा फिलहाल टालने की सलाह दी है।
A press release by Ministry of Health and Family Welfare reads: "In light of the reported outbreaks of Ebola Disease in the Democratic Republic of the Congo (DRC) and Uganda, the World Health Organization (WHO), under the International Health Regulations (IHR), 2005, on 17 May… pic.twitter.com/ss7JL9JxNJ
— Press Trust of India (@PTI_News) May 24, 2026
स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है, कि अभी तक भारत में इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय यात्रा और व्यापार को देखते हुए एहतियाती कदम तेज कर दिए गए है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, कांगो में अब तक 82 मामले और सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी हैं, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है।
दरअसल, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के लगभग 867 संदिग्ध मामले और 204 मौतें दर्ज की गई हैं। यह वायरस अब तीन प्रांतों तक फैल चुका है और पड़ोसी मुल्क युगांडा में भी दो मामले सामने आए है। बताया जा रहा है, कि संक्रमण का कारण इबोला का दुर्लभ बुंडिबुग्यो स्ट्रेन है, जिसके लिए अभी तक कोई निश्चित वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला एक बेहद ही गंभीर और जानलेवा वायरल संक्रमण है। यह संक्रमित व्यक्ति अथवा पशु के संपर्क में आने से फैलती है। इसके लक्षण तेजी से बढ़कर बेहद गंभीर हो सकते है। शुरुआती लक्षणों में सामान्य बुखार होता है, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति गंभीर हो सकती है। इबोला संक्रमित व्यक्ति के खून, अंगों और शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है।
