उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री जनरल बीसी खंडूड़ी
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन हो गया है। वे काफी समय से अस्वस्थ होने के कारण देहरादून के मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। उनकी बेटी उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी ने पिता के निधन की पुष्टि की है। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीति, समाज और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए अपने शोक संदेश में लिखा, “उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। श्री खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।”
सीएम धामी ने अपने संदेश में लिखा, “सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा। राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई।”
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ।
श्री खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका… pic.twitter.com/AMd7Famr09
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) May 19, 2026
मुख्यमंत्री ने कहा, कि एक जननेता के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता से लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
जानकारी के अनुसार, 91 वर्षीय भुवन चंद्र खंडूड़ी का देहरादून स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में तकरीबन एक माह से इलाज चल रहा था। वे भारतीय सेना से मेजर जनरल के पद से रिटायर्ड हुए थे और उत्तराखंड के चौथे मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य की सेवा की। वे उत्तराखंड के दो बार मुख्यमंत्री बने। इससे पहले वे केंद्रीय मंत्री भी रहे चुके थे।
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी अपने सख्त अनुशासन, साफ-सुथरी छवि और ईमानदार कार्यशैली के कारण उत्तराखंड की राजनीति में एक अलग पहचान रखते थे। उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता था, जो फैसले लेने में दृढ़ और प्रशासनिक मामलों में बेहद सख्त माने जाते थे। खंडूरी पहली बार वर्ष 2007 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने।
उन्होंने मार्च 2007 से लेकर जून 2009 तक राज्य की कमान संभाली। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक सुधार, सड़क निर्माण और पारदर्शिता को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। हालांकि, 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वर्ष 2011 में एक बार फिर उन्हें उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया गया।
उन्होंने सितंबर 2011 से लेकर मार्च 2012 तक दूसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। अपने दूसरे कार्यकाल में भी उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने की कोशिश की। खंडूरी के नेतृत्व में “खंडूरी है जरूरी” जैसे नारे भी काफी लोकप्रिय हुए, जो उनकी सख्त और ईमानदार छवि को दर्शाते थे।
मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से 16वीं लोकसभा के सदस्य भी रहे थे। 2011 में जब अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चरम पर था, तब जनरल खंडूड़ी ने उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त लोकायुक्त बिल पेश किया। भुवन चंद्र खंडूरी को उत्तराखंड में एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने राजनीति में स्वच्छता, पारदर्शिता और अनुशासन को प्राथमिकता दी।
