सांकेतिक चित्र (फोटो साभार: freepik.com)
मुंबई में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में इसे तरबूज खाने से हुई फूड पॉइजनिंग माना जा रहा था, लेकिन अब फॉरेंसिक जांच में पता चला है, कि मौत जिंक फॉस्फाइड नाम के जहरीले रसायन से हुई। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है, कि अब तक की जांच में किसी भी आपराधिक साजिश के साक्ष्य नहीं मिले है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई के पायधुनी इलाके में फूड पॉइजनिंग से एक ही परिवार के चार सदस्यों की रहस्यमयी मौत की गुत्थी सुलझ गई है। कलिना फॉरेंसिक लैब (FSL) की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है, कि उनके द्वारा खाए गए तरबूज में ‘जिंक फॉस्फाइड’ (चूहे मारने वाला जहर) मौजूद था और इसी जहर के कारण पूरे परिवार की जान गई।
फॉरेंसिक लैब (FSL) ने 11 दिनों तक चली गहन जाँच और लगभग 54 विभिन्न परिक्षण के बाद दावा किया है, जहर तरबूज के ऊपरी हिस्से पर नहीं, बल्कि उसके अंदर था। परिवार के सदस्यों के लीवर, किडनी और पेट के सैंपल्स (विसरा) में भी यही जहर पाया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है, कि चिकन बिरयानी में कोई जहर नहीं मिला।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब कोई ‘जिंक फॉस्फाइड’ खाता है, तो शरीर के अंदर ‘फॉस्फीन गैस’ का निर्माण होता है। यह गैस सीधे फेफड़ों पर अटैक करती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरा देती है। इसी वजह के चलते 13 साल की जैनब की मौत सबसे पहले हुई। डॉक्टर बताते है, कि गैस बनने के बाद मृत्यु लगभग निश्चित हो जाती है।
मुंबई पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है, कि आखिर तरबूज के अंदर जहर पहुँचा कैसे ? फॉरेंसिक अधिकारियों का मानना है, कि इसे इंजेक्शन से माध्यम से अंदर डालना कठिन है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है, कि क्या दुकानदार के स्तर पर कोई लापरवाही हुई अथवा किसी ने सुनियोजित षड्यंत्र के तहत तरबूज में जहर मिलाया?
बता दें, कि शनिवार 25 अप्रैल की रात दोकाडिया परिवार के कुल नौ सदस्यों ने रात करीब 10:30 बजे साथ में खाना खाया था। इसके बाद रिश्तेदार अपने-अपने घर लौट गए। देर रात करीब 1:30 बजे के बीच परिवार के इन चारों लोगों ने तरबूज खाया था। 26 अप्रैल की सुबह करीब 6 बजे के बीच चारों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत हुई।
अस्पताल ले जाने के दौरान एक-एक कर सबने दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान अब्दुल्ला दोकाडिया (40) उनकी पत्नी नसरीन (35) बेटी आयशा (16) और जैनब (13) के रूप में हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, परिवार ने तरबूज खाने के 4-5 घंटे बाद अस्पताल का रुख किया। अगर वे एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुँच जाते, तो ‘स्टमक वॉश’ के जरिए उनकी जान बचाई जा सकती थी।
