सांकेतिक चित्र
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश भारत ने घरेलू कीमतें काबू में रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर सितंबर 2026 तक रोक लगा दी है। सरकार ने यह कदम देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और इसकी कीमतों को नियंत्रित करने के तहत उठाया है।
समाचार एजेंसी एएनआई की एक्स पोस्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने बुधवार को एक अधिसूचना में कहा, कि उसने 30 सितंबर, 2026 तक या अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अनुसार, यह प्रतिबंध कच्ची, सफेद और परिष्कृत चीनी पर लागू होता है। सरकार ने नीति में बदलाव करते हुए चीनी को निषिद्ध श्रेणी में रख दिया है।
The Central Government bans the export of sugar with immediate effect till September 30, 2026, or until further orders. Directorate General of Foreign Trade (DGFT) issues a notification amending the export policy from 'Restricted' to 'Prohibited'.
The prohibition will not apply… pic.twitter.com/TwafGBuXRl
— ANI (@ANI) May 14, 2026
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध मौजूदा टैरिफ-दर कोटा और व्यवस्थाओं के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को चीनी निर्यात पर लागू नहीं होगा। इसके साथ ही एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के तहत किए जाने वाले एक्सपोर्ट और खाद्य सुरक्षा के उद्देश्यों के लिए सरकार से सरकार (G2G) स्तर पर भेजे जाने वाले शिपमेंट को भी जारी रखने की अनुमति होगी।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार के इस फैसले का उद्देश्य घरेलू कीमतों को काबू में रखना है, क्योंकि मुख्य गन्ना उत्पादक इलाकों में गन्ने की पैदावार कम होने के कारण लगातार दूसरे साल उत्पादन खपत से पीछे रहने की उम्मीद है। साथ ही इस बात का भी डर है, कि अल नीनो की स्थितियां आने वाले मॉनसून को बिगाड़ सकती हैं, जिससे अगले सीजन के उत्पादन को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई है।
बता दें, कि भारत, ब्राजील के बाद दुनिया का सबसे बड़ा चीनी निर्यातक देश है। इससे पहले भारत ने घरेलू मांग से अधिक उत्पादन की उम्मीद में मिलों को 15 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी, लेकिन अब आशंका है कि प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार कमजोर होने की वजह से उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष खपत से कम रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है, कि भारत के इस फैसले से वैश्विक बाजार में कच्ची और सफेद चीनी की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। साथ ही एशिया और अफ्रीका के बाजारों में ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों के लिए निर्यात के नए अवसर भी बन सकते हैं।
