सिविल जज की नौकरी छोड़ साध्वी बनेगी प्रखरश्री जैन, (फोटो साभार: अमर उजाला)
बैतूल में प्रखरश्री दीदी ने एलएलएम में गोल्ड मेडल, लंदन स्कूल ऑफ इकोनामिक्स से उच्च शिक्षा और सिविल जज के पद पर चयन जैसी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने के बाद न्यायिक सेवा में ज्वाइनिंग करने के बजाय अध्यात्म का मार्ग चुना। बताया जा रहा है, कि उनके माता-पिता का सपना था, कि वह न्यायिक सेवा में जाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैतूल निवासी प्रखरश्री दीदी ने पिता का सपना पूरा करने के लिए पहले जज की परीक्षा पास की। चयनित होने के बाद ज्वाइनिंग से पहले ही उन्होंने वैराग्य का मार्ग चुन लिया है और जैन धर्म की दीक्षा लेने का निर्णय किया।
मध्य प्रदेश के बैतूल में एक अनोखा धार्मिक आयोजन देखने को मिला. जज की परीक्षा पास करने के बाद जॉइनिंग से पहले ही प्रखरश्री दीदी ने सांसारिक जीवन छोड़कर जैन दीक्षा का मार्ग चुन लिया.
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— AajTak (@aajtak) November 2, 2026
रविवार को जैनेश्वरी दीक्षा की ओर अग्रसर नगर गौरव ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी सहित 5 दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में भव्य बिनौली चल समारोह निकाला गया। इस दौरान विंटेज कारों का आकर्षक काफिला और सजी हुई शाही बग्घियां शहर की सड़कों से गुजरी, तो जगह-जगह पांचों दीक्षार्थी बहनों का फूल-मालाओं से स्वागत किया।
दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में आयोजित धार्मिक चल समारोह में स्थानीय जैन समाज के लोगों के साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। चल समारोह का समापन जैन दादावाड़ी में हुआ, जहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म संपन्न हुई।
गौरतलब है, कि प्रखरश्री दीदी ने अपनी शैक्षणिक यात्रा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कामन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) उत्तीर्ण कर अहमदाबाद से एलएलबी की पढ़ाई की। इसके बाद एलएलएम में गोल्ड मेडल हासिल किया।
उच्च शिक्षा के लिए लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से भी कोर्स किया। वर्ष 2023 में उनका चयन सिविल जज के पद पर हुआ। वहीं प्रखरश्री दीदी के पिता जेके जैन भारतीय जीवन बीमा निगम में विकास अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने कहा, कि परिवार में शुरू से ही धार्मिक वातावरण रहा है।
