सांकेतिक चित्र
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से अमल किया जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में तैनात ऑर्थोपेडिक सर्जन को विजिलेंस की टीम ने पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।
जानकारी के अनुसार, चिकित्सक ने दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाने के एवज में रिश्वत मांगी थी। शिकायत की पुष्टि के बाद विजिलेंस टीम ने मामले की जांच की और डॉक्टर को पांच हजार रुपये लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया।
विजिलेंस विभाग की टीम को हेल्पलाइन नंबर 1064 पर शिकायत प्राप्त हुई थी, विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाने के एवज में जिला अस्पताल में तैनात ऑर्थोपेडिक्स सर्जन डॉ. अंकुर ठाकुर पांच हजार रुपए की डिमांड कर रहा है। शिकायत मिलने के बाद सतर्कता विभाग (विजिलेंस) ने मामले की गोपनीय जांच कराई।
प्रारंभिक जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक सतर्कता सेक्टर देहरादून के निर्देश पर विजिलेंस टीम ने आरोपी डॉक्टर को पकड़ने के लिए अपना जाल बिछाया।
मंगलवार 29 सितंबर को शिकायतकर्ता ने जैसे ही डॉक्टर को रिश्वत के पांच हजार रुपए दिए, तभी विजिलेंस की टीम ने आरोपी डॉक्टर को रंगे हाथ दबोच लिया। विजिलेंस विभाग की इस कार्रवाई से अस्पताल में हड़कंप मच गया। आरोपी डॉक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम ने डॉक्टर के आवास पर भी छापा मारा। अब गिरफ्तार डॉक्टर को विजिलेंस टीम आगे की कार्रवाई के लिए देहरादून लेकर आएगी। विजिलेंस विभाग ने आमजन से अपील की है, कि यदि किसी भी विभाग का अधिकारी-कर्मचारी रिश्वत मांगता है, तो उसकी शिकायत 1064 पर करें।
