CM धामी ने 'मसूरी गोलीकांड' के बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी, (चित्र साभार: X@DIPR_UK)
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज बुधवार को मसूरी गोलीकांड के शहीदों को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। मसूरी गोलीकांड की 32वीं वर्षगांठ पर सीएम धामी ने खटीमा से श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को वर्चुअली संबोधित किया। दरअसल, मौसम खराब होने के कारण वह मसूरी नहीं पहुंच पाए।
सीएम धामी ने मसूरी गोलीकांड की बरसी पर शहीद राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए अपने संबोधन में कहा, “उत्तराखंड राज्य आंदोलन हमारे इतिहास का वह गौरवपूर्ण अध्याय है, जिसमें राज्य आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष, तप, त्याग और बलिदान से अलग राज्य के सपने को साकार किया।”
#WATCH | Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami participated virtually from Khatima in a tribute program being held at Shaheed Sthal, Jhoolaghar, Mussoorie, Dehradun, in memory of the statehood activists who were martyred during the Uttarakhand statehood movement.
CM Dhami says, "On… pic.twitter.com/wNvftOPuqh
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) September 2, 2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बलिदानियों को नमन करते हुए कहा, कि राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीदों का बलिदान प्रत्येक उत्तराखंडवासी की स्मृतियों में सदैव जीवंत रहेगा। उन्होंने कहा, कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और योगदान को सम्मान देते हुए उन्हें एवं उनके आश्रितों के लिए सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
सीएम धामी ने बताया, कि राज्य आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी करने के साथ ही 98 आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में सेवायोजित किया गया है। हमारी सरकार उनके सपनों और शहीदों की भावनाओं के अनुरूप एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा, कि उत्तराखंड राज्य लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद अस्तित्व में आया है। राज्य निर्माण के लिए शहीदों ने अपने भविष्य की चिंता किए बिना आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए बलिदान दिया। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा, कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में मातृशक्ति का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा, कि सरकार राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं के अनुरूप काम कर रही है। आंदोलनकारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने की दिशा में सरकार ने कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, कि सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन बढ़ाने का काम किया है।
सीएम धामी ने कहा, कि राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है। राज्य आंदोलनकारियों की लंबे समय से चली आ रही भू-कानून की मांग को सरकार ने लागू किया है। राज्य में सड़क और रेल कनेक्टिविटी के विकास पर तेजी से काम किया जा रहा है। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, कि उत्तराखंड को देश के श्रेष्ठ राज्यों में शामिल करने के लक्ष्य के साथ सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, कि सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड का कोई भी युवा रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर न हो। इसके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ ही राज्य के विकास पर लगातार काम किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है, कि दो सितंबर का वो खौफनाक दिन आज भी मसूरीवासियों की धड़कनें तेज कर देता है। वर्ष 1994 में इसी दिन पीएसी और पुलिस ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन की मांग कर रहे आंदोलनकारियों के ऊपर अंधाधुन गोलियां बरसा दी थी। इस गोलीकांड में मसूरी के छह आंदोलनकारी बलिदान हुए और दर्जनों घायल हुए थे। वहीं, एक पुलिस उपाधीक्षक की भी मौत हुई थी।
32 साल पहले दो सितंबर 1994 को हुई इस दर्दनाक घटना को याद करके आंदोलनकारियों और बलिदानियों के परिजनों का दर्द छलक उठता है। उनका कहना है, कि उस समय आंदोलन केवल अलग राज्य की मांग तक सीमित नहीं था। इसके पीछे पहाड़ के लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के साथ जीने का अवसर देने तथा पलायन रोकने की उम्मीद थी।