रामपुर तिराहा कांड, (फोटो साभार : जागरण)
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान घटित रामपुर तिराहा गोलीकांड मामले पर आज नैनीताल हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान करते न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने निर्णय को सुरक्षित रख लिया है। वहीं इससे पहले हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा था, कि जो 6 मामले दर्ज हुए थे, वो किस कोर्ट में और कहां चल रहे हैं और उनकी स्थिति क्या है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार (10 मार्च 2026) को उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में कहा गया, कि अनंत कुमार सिंह का केस कहां चल रहा है, उसकी क्या स्थिति है? इस संबंध में कोई रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध नहीं है। जिस पर याचिकाकर्ता द्वारा कोर्ट को बताया गया, कि जब से मुकदमे दर्ज हुए हैं, उन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
याचिकाकर्ता ने कहा, कि इस गोलीकांड को पूरे 30 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन उनकी क्या स्थिति है, इसका आज भी कुछ पता नहीं है। मामले में देहरादून जिला जज ने नैनीताल हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के एक पत्र पर इन मुकदमों को मुजफ्फरनगर कोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा था, तब से लेकर आज तक इनमें कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।
राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता रमन शाह ने बताया, कि रामपुर तिराहा कांड के दौरान 7 महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ था, जबकि, 17 अन्य लोगों को अमानवीय तरीके से प्रताड़ित किया गया था। मामले में मुख्य आरोपी मुजफ्फरनगर के तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह समेत 7 अन्य आरोपियों के मामले सीबीआई द्वारा मुजफ्फरनगर कोर्ट को स्थानांतरित कर दिए गए थे, लेकिन सुनवाई अभी तक लंबित है।
बता दें, कि रामपुर तिराहा कांड जिसे मुजफ्फरनगर गोलीकांड भी कहा जाता है। उत्तराखंड राज्य गठन आंदोलन के दौरान 2 अक्टूबर 1994 को घटित एक दुखद घटना थी। मुजफ्फरनगर जिले के रामपुर तिराहे पर उत्तराखंड के हजारों आंदोलनकारियों पर पुलिस और पीएसी ने गोलीबारी की थी, जिससे कई लोगों की जान चली गई थी और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार भी किया गया था।
उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी, जिन पर इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगे थे। इस घटना के बाद उत्तराखंड के लोगों में आक्रोश फैल गया था। इस घटना को उत्तराखंड के इतिहास का काला अध्याय माना जाता है।
