मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, (फाइल चित्र)
हरिद्वार जमीन घोटाले को लेकर धामी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कई अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। एक आईएएस अधिकारी की बर्खास्तगी तक का निर्णय लिया गया है, जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी को भी मेजर पनिशमेंट देने का फैसला हुआ है। बता दें, कि राज्य में किसी बड़े अधिकारी पर कठोर कार्रवाई को लेकर धामी सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया है।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के संकल्प के तहत हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की गई है। विजिलेंस की विस्तृत जांच में आपराधिक षड्यंत्र एवं धोखाधड़ी के माध्यम से भूमि क्रय-विक्रय कर नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों तथा भूमि विक्रेताओं के विरुद्ध अभियोग दर्ज किए जाने का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अनुमोदन किया गया है। जांच में दोषी पाए गए व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
Uttarakhand CMO says – In line with Chief Minister Pushkar Singh Dhami’s zero-tolerance policy against corruption, major action has been taken in the Haridwar Municipal Corporation land purchase case. A detailed vigilance investigation has prima facie established allegations of…
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 19, 2026
इस मामले में जिन लोगों के विरुद्ध अभियोग दर्ज करने की संस्तुति की गई है, उनमें तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियन्ता एवं प्रभारी अधिशासी अभियन्ता आनन्द सिंह मिश्राण, तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों में सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक यादव तथा सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी अभियोग दर्ज किया जाएगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है, कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। शासन की प्राथमिकता पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करना है तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।
धामी सरकार द्वारा हरिद्वार में तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी IAS वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है। इसके अलावा तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को भी मेजर पनिशमेंट देने का फैसला लिया गया है। वहीं तीसरे बड़े अधिकारी पीसीएस अफसर अजय वीर की तीन वेतन वृद्धियों को रोकने के निर्देश दिए गए है।
दरअसल, धामी सरकार के इस फैसले को इसलिए बड़ा फैसला माना जा रहा है, क्योंकि पहले ही इस मामले में दो आईएएस अधिकारियों के अलावा एक पीसीएस और तमाम विभागीय अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। अब विजिलेंस की जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई का फैसला भी ले लिया गया है। प्रकरण में अब विजिलेंस को मुकदमा दर्ज करने की भी मंजूरी दे दी गई है।
बता दें, कि मामला जनपद हरिद्वार में 2 हेक्टेयर से ज्यादा की जमीन 54 करोड़ में खरीदने से जुड़ा हुआ है, जिसकी बाजार में कीमत 15 करोड़ बताई जा रही है। इस अनुपयुक्त और बेकार भूमि को हरिद्वार नगर निगम ने अत्यधिक दाम में खरीदा था। जांच में सामने आया, कि वर्तमान में इस भूमि को खरीदने की कोई तात्कालिक जरुरत नहीं थी, न ही खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई।
उल्लेखनीय है, कि उत्तराखंड में संभवतः पहली बार ऐसा हुआ है, कि प्रदेश सरकार ने अपने ही सिस्टम में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों पर इस प्रकार की सख्त कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लिए गए सख्त फैसले ने उत्तराखंड की प्रशासनिक और राजनीतिक संस्कृति में एक निर्णायक बदलाव के संकेत दिए है।
