संसद परिसर में पप्पू यादव की नौटंकी,(फोटो साभार: सोशल मीडिया)
संसद भवन परिसर के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार के बाहर साधु-संतों की वेशभूषा का उपयोग कर भगवा वस्त्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली नौटंकी का प्रदर्शन किया। इसके प्रदर्शन के माध्यम से विपक्ष ने कथित चढ़ावा चोरी को लेकर हंगामा किया।
दरअसल, विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर शुक्रवार को संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। इसमें भगवा वस्त्र पहने सांसद पप्पू यादव चढ़ावा बटोरते नजर आए। जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई सांसद चढ़ावा चढ़ाते नजर आए। इस दौरान कई अन्य विपक्षी सांसद भी मौजूद रहे।
तय मानिए, राहुल गांधी हिन्दू आस्था का मजाक बनाते मजाक बनते दिख रहे हैं। पप्पू यादव को पुजारी बनाया है, इसे भी सामान्य मत समझिए, समझकर ही बनाया होगा। अब रामजी ही तय करेंगे pic.twitter.com/IcY2bQ5Zhr
— हर्ष वर्धन त्रिपाठी 🇮🇳Harsh Vardhan Tripathi (@MediaHarshVT) July 31, 2026
वहीं विपक्ष के प्रदर्शन पर संत समाज ने नाराजगी जताते हुए इसे साधु-संतों और भगवा वस्त्र का अपमान बताया। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा है, कि यदि इस मामले में बिना शर्त सार्वजनिक माफी नहीं मांगी जाती है, तो लोकसभा अध्यक्ष को इस पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लेना चाहिए और उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
बताया जा रहा है, कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा भी इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताई गई है और मौजूदा दिशानिर्देशों को अब सख्ती से लागू करने की तैयारी की जा रही है। बता दें, कि संसद भवन परिसर के मकर द्वार पर किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति पहले से ही नहीं है। इसके बावजूद विपक्षी सांसदों ने इस तरह के नाटक का मंचन किया।
चढ़ावा चोरी पर पप्पू यादव के स्वांग को लेकर लोक सभा सचिवालय सख़्त।
संसद भवन परिसर में इस तरह के आचरण की अनुमति नहीं दी जा सकती
स्पीकर ने भी पप्पू यादव के आचरण पर एतराज़ किया है
लोक सभा सचिवालय के दिेशानिर्देशों के अनुसार मकर द्वार पर प्रदर्शन की इजाज़त नहीं
इसे सख्ती से… pic.twitter.com/4mYDt54BRc
— Akhilesh Sharma (@akhileshsharma1) July 31, 2026
उल्लेखनीय है, कि जिस कालखंड में राम मंदिर निर्माण को लेकर संघर्ष किया जा रहा था, उस वक्त विपक्ष द्वारा इस संघर्ष में कभी किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया गया। इसके विपरीत, पिछली सरकारों और विपक्षी दलों ने सदैव राम सेवकों पर अत्याचार और हिंसा को बढ़ावा दिया था। वहीं वर्तमान में संतों का इस तरह मजाक उड़ाना ओछी मानसिकता को रेखांकित करता है।
