प्रतीकात्मक चित्र
अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या को भारत में घुसपैठ कराने और उनके फर्जी दस्तावेज बनवाने वाले सिंडिकेट के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मारे गए छापों में बड़ा खुलासा हुआ है। जाँच में खुलासा हुआ है, कि घुसपैठियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें भारत के अलग-अलग हिस्सों में बसाया जा रहा है।
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आया, कि एटीएस द्वारा इस सिंडिकेट के खिलाफ की गई कार्रवाई के बावजूद पश्चिम बंगाल में यह अवैध कारोबार लगातार फल-फूल रहा था। जिन एनजीओ को विदेश से फंडिंग हो रही थी, उन्होंने करोड़ों रुपये की रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया, ताकि जांच एजेंसियों से उसे बचाया जा सके।
बता दें, कि ईडी ने बीते गुरूवार को बांग्लादेशियों-रोहिंग्या की घुसपैठ से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत चार राज्यों के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें यूपी के सहारनपुर (देवबंद), दिल्ली के जामिया नगर, हरियाणा के बल्लभगढ़ (फरीदाबाद) और पश्चिम बंगाल के उत्तर-दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद के इलाके शामिल थे।
देश के 17 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी के दौरान प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को तमाम आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनकी पड़ताल में सामने आया है, कि अत्यधिक सतर्कता के बावजूद कुछ एनजीओ विदेश से अभी तक फंडिंग हासिल कर रहे है।
मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है, कि प्रवर्तन निदेशालय इस खुलासे के बाद अब इस मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, ताकि घुसपैठियों को बसाने, मदरसों और मस्जिदों के निर्माण के लिए हो रही विदेशी फंडिंग को पूरी तरह से रोका जा सके।
इसके अलावा ईडी शीघ्र ही उन बैंकों से भी जवाब-तलब करेगी, जिनके यहां एनजीओ के एफसीआरए खाते खोलकर विदेश से रकम मंगाई जाती थी। साथ ही उन छोटे बैंकों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा, जो बिना केवाईसी घुसपैठियों के खाते खोल रहे थे।
ईडी की जांच में सामने आया है, कि संदिग्ध घुसपैठियों को भारत में बसाने में मदद करने के लिए छह हजार, आठ हजार और 10 हजार रुपये की छोटी-छोटी किस्तों में पैसे ट्रांसफर किए गए। अधिकारियों का दावा है, कि धनशोधन के जरिये जुटाए गए फंड का मुख्य इस्तेमाल घुसपैठियों के आर्थिक पुनर्वास के लिए किया गया, ताकि उन्हें भारत में स्थायी रूप से बसाया जा सके।
गौरतलब है, कि देश में अवैध घुसपैठ खासतौर पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या वर्तमान में राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए बड़ी चुनौती बन गए है। बहुत बड़ी संख्या में घुसपैठियों का भारत में आना सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और आर्थिक विकास के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अवैध घुसपैठ से जनसंख्या का संतुलन बिगड़ रहा है और जनसांख्यिकी संरचना बदल रही है।
भारत के गृहमंत्री अमित शाह द्वारा घुसपैठ की समस्या पर गंभीरता से संज्ञान लिया गया है। उन्होंने राज्य सरकारों के साथ मिलकर घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें उनके देश भेजने की आवश्यकता पर जोर देते हुए बिहार, राजस्थान, गुजरात और त्रिपुरा के सीमावर्ती जिलों का दौरा करने के बाद सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की बैठक बुलाई थी।
इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों उच्चाधिकार प्राप्त समिति के साथ उच्च स्तरीय बैठक के दौरान सीमावर्ती इलाकों के साथ-साथ महानगरों और औद्योगिक शहरों का दौरा कर जमीनी स्तर पर समस्या का आंकलन करने की जरूरत बताई।
बता दें, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष 15 अगस्त को लालकिले के प्राचीर से अवैध घुसपैठ और इसके कारण सीमावर्ती इलाकों में हो रहे जनसांख्यिकी बदलाव को देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए इससे निपटने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त मिशन शुरू करने की घोषणा की थी।
