सांकेतिक चित्र : AI
अमेरिका की तरफ से मिलने वाली प्रतिबंधों की छूट खत्म होने के बाद भी भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा। दरअसल, रूस से तेल आयात को लेकर मोदी सरकार ने बीते सोमवार को साफ शब्दों में कहा है, कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा, चाहे अमेरिका की तरफ से कोई छूट मिले या नहीं।
समाचार एजेंसी एएनआई की एक्स पोस्ट के मुताबिक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा, “अमेरिका की तरफ से रूस पर छूट को लेकर मैं यह साफ करना चाहती हूँ, कि भारत पहले भी रूस से तेल खरीदता था। छूट के दौरान भी खरीदता रहा और अब भी खरीद जारी रहेगी।”
#WATCH | Delhi: Sujata Sharma, Joint Secretary (Marketing & Oil Refinery), Ministry of Petroleum & Natural Gas, says, "Regarding American waiver on Russia, I would like to emphasise that we have been purchasing from Russia before waiver also, during waiver, and now also. It is… pic.twitter.com/aFlZwNPJZn
— ANI (@ANI) May 18, 2026
उन्होंने कहा, कि भारत के लिए तेल खरीदने में सबसे अहम बात आर्थिक मजबूती और व्यापारिक फायदा है। सुजाता शर्मा ने यह भी बताया, कि देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और भारत ने पर्याप्त मात्रा में तेल की व्यवस्था कर रखी है।
उन्होंने कहा, “तेल खरीदने का फैसला पूरी तरह व्यापारिक समझ और फायदे को देखकर लिया जाता है। कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त मात्रा में तेल की व्यवस्था बार-बार की गई है, इसीलिए छूट मिले या नहीं मिले इससे हमारी सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”
जानकारी के लिए बता दें, कि ट्रंप प्रशासन ने इससे पहले मार्च में रूस से समुद्री रास्ते से आने वाले तेल की खरीद से जुड़ा 30 दिनों का लाइसेंस जारी किया था। बाद में इस छूट की अवधि 16 मई तक बढ़ा दी थी। दरअसल, वर्तमान में भारत की कुल तेल जरूरतों का करीब 35% से 45% हिस्सा अकेले रूस से पूरा हो रहा है।
गौरतलब है, कि भारत ने कभी भी रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया। वर्ष 2022 में रूस से सस्ते दामों पर कच्चा तेल मिलने के बाद भारत ने बड़ी मात्रा में खरीद शुरू की थी और तब से खरीद में बढ़ोतरी या कमी सप्लाई और आर्थिक स्थिति के हिसाब से होती रही है। दरअसल, अमेरिका के इस दावे के बावजूद कि उसने भारत को रूसी तेल खरीदने से रोक दिया है।
फरवरी 2026 में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल का 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सा रूस से आयात किया। भारत सरकार कई बार यहाँ तक कि संसद में भी साफ कर चुकी है, कि किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदना भारत का संप्रभु फैसला है, जो देशहित को ध्यान में रखकर लिया जाता है।
भारत अपने जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसीलिए जहाँ तेल सस्ता मिलता है भारत वहीं से खरीदता है। इतना ही नहीं, ट्रंप प्रशासन ने खुद माना था, कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से दुनिया में तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं।
पिछले साल भारत के विदेश मंत्रालय ने भी बताया था, कि अमेरिकी सरकार ने भारत से कहा था कि वह रूस से तेल खरीदना जारी रखे, ताकि वैश्विक तेल बाजार स्थिर बना रहे। हालाँकि, बाद में अमेरिका ने अपना ही रुख बदलते हुए रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया।
वहीं भारत ने एक फिर साफ संकेत दिए हैं, कि वर्तमान पश्चिम एशिया संकट के बीच भी देश की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हित उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बने रहेंगे। बता दें, कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की चेतावनियों और प्रतिबंधों की समय-सीमा खत्म होने के बाद भी भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बरकरार रखा है।
