पंचतत्व में विलीन हुए हरीश राणा (फोटो साभार: NDTV)
13 साल तक कोमा में रहने के बाद आखिरकार हरीश ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा का आज बुधवार दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क में अंतिम संस्कार कर दिया गया। बता दें, कि 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट से ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की ऐतिहासिक अनुमति मिलने के बाद एम्स (AIIMS) में उन्होंने अंतिम सांस ली।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हरीश के पिता अशोक राणा ने जब सोसाइटी के व्हाट्सएप ग्रुप पर उनके जाने की खबर दी, तो हर आँख नम हो गई। उनके निधन की खबर मिलते ही गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एंपायर सोसाइटी में शोक का माहौल है। सोसाइटी के लोगों का कहना है, कि परिवार ने इन 13 वर्षों में जो सहा उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
Delhi: The mortal remains of Harish Rana, the first person in India permitted passive euthanasia, were cremated by his brother Ashish Rana and sister Bhavna pic.twitter.com/PFBc5WH97C
— IANS (@ians_india) March 25, 2026
बता दें, कि वर्ष 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई के दौरान हरीश चौथी मंजिल से गिर गए थे। सिर में गंभीर चोट के कारण वे कोमा में चले गए और तब से लाइफ सपोर्ट पर थे। भाई आशीष और पूरे परिवार ने 13 वर्षों तक मशीनों के बीच उनकी सेवा की, लेकिन जब सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची, तब भारी मन से गरिमापूर्ण मृत्यु के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एम्स की विशेष मेडिकल टीम ने चरणबद्ध तरीके से लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान चिकित्सकों ने सुनिश्चित किया, कि हरीश को कोई पीड़ा न हो। अंतिम विदाई से पहले ब्रह्माकुमारी की सदस्य ने उन्हें तिलक लगाकर शांति से विश्राम करने की प्रार्थना की। अंतिम यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों और परिजनों ने भारी मन से उन्हें विदाई दी।
