19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक चलने वाले ये नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना के लिए समर्पित होते हैं। इस तिथि पर कई शुभ संयोग का साया बना हुआ है, जो पूजा-पाठ के लिए बेहद लाभकारी है।
19 मार्च से हिंदू नववर्ष के साथ-साथ गुड़ी पड़वा भी मनाया जाएगा। इस तिथि पर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग का संयोग रहेगा। शक्ति की देवी को समर्पित नवरात्र का पवित्र त्यौहार शरीर और मन में ऊर्जा का पुनःसंचार करने का समय होता है। यह त्यौहार भारत के साथ- साथ विदेशों में निवास कर रहे सनातन समाज के लोगो द्वारा भी बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता हैं।
नवरात्र के त्यौहार के दौरान हिंदू समाज के अनुयायी अपने आपको दैनिक दिनचर्या से अलग कर लेते है। सनातन धर्म में इसी को वास्तविक सुख एवं आध्यात्मिक आनंद का स्रोत माना गया है। नवरात्र के दिन भगवान द्वारा नारी प्रकृति को समर्पित है। प्राचीन काल से ही शक्ति की देवी माँ भगवती, धन की देवी लक्ष्मी एवं विद्या की देवी माता सरस्वती को स्त्री प्रकृति के तीन मुख्य आयामों के प्रतीकों के समान माना जाता है।
यह मानव अस्तित्व के तीन मूलभूत गुणों सत्व,रज एवं तमस का प्रतीक है। यह सभी तीन खगोलीय गुण में मनुष्य शरीर की रचना से अत्यंत गहराई से जुड़े हुए है। हिंदू पुराणों के अनुसार, पृथ्वी पर नारी की पूजा का स्वरुप ही सबसे अधिक पूजनीय है।
इसके अलावा भारत ही एक मात्र राष्ट्र है, जहाँ नारी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र एक अवसर है, जब साधक प्रकृति में बदलाव के समय शरीर के चेतना में स्थित स्थूल भौतिक जीवन से सूक्ष्म आध्यात्मिक संसार की यात्रा कर सकता है।
नवरात्र का पावन त्यौहार हिन्दू पंचाग के अनुसार, यह प्रत्येक वर्ष प्रथम नवरात्रि चैत्र मास में मनाया जाता है, एवं दूसरा शारदीय नवरात्र अश्विन मास में धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्र के पवित्र 9 दिवसों तक चलने वाली पूजा में माँ दुर्गा के 9 विभिन्न स्वरूपों की उपासना की जाती है।
