NASA अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन, (फोटो साभार: X@astro_anil)
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 14 जुलाई को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए आठ महीने के मिशन पर रवाना होंगे। वह रूस के सोयुज MS-29 (Soyuz MS-29) अंतरिक्ष यान से कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से उड़ान भरेंगे। इस मिशन के दौरान वह कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।
नासा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रूस की स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस के सोयुज एमएस-29 स्पेसक्राफ्ट से अनिल मेनन के साथ रूसी कॉस्मोनॉट प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकिना अंतरिक्ष यात्रा पर जाएंगे। कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से लॉन्च करने के बाद, तीनों लगभग आठ महीने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में बिताएंगे।
Cool moment at T-5 putting an expedition 75 sticker on the launch bus. We will be joining 74 but 75 is not far off…… pic.twitter.com/FAFY6TXx6H
— Anil Menon (@astro_anil) July 9, 2026
रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर 2021 में अनिल मेनन का चयन नासा के अंतरिक्ष यात्री के रूप में हुआ और अगले महीने उन्होंने दो वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया। उन्होंने सितंबर 2024 में स्पेसएक्स द्वारा संचालित निजी मानव अंतरिक्ष मिशन ‘पोलारिस डॉन’ के तहत अंतरिक्ष की यात्रा की थी। यह मिशन लगभग करीब पांच दिनों दिन तक चला था।
मिनियापोलिस में जन्मे 49 साल के अनिल मेनन यूक्रेनी और भारतीय प्रवासी माता-पिता की संतान है। पेशे से आपातकालीन चिकित्सा के फिजिशियन, मैकेनिकल इंजीनियरिंग अनिल मेनन वर्तमान में अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल के पद पर तैनात है। उनकी पत्नी अन्ना विल्हेम भी अंतरिक्ष यात्री है।
अनिल मेनन ने 2014 में नासा में फ्लाइट सर्जन के रूप में अपना करियर शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहने और काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के साथ काम किया। इसके अलावा उन्होंने ऑपरेशन एन्ड्योरिंग फ्रीडम के तहत अफगानिस्तान में फ्रंटलाइन पर सेवा दी थी।
अपने मिशन के दौरान अनिल मेनन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहते हुए लंबी अवधि की अंतरिक्ष उड़ानों के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेंगे। वह यह जांच करेंगे, कि माइक्रोग्रैविटी अंतरिक्ष यात्रियों में रक्त प्रवाह, नसों की संरचना और रक्त की बनावट को किस तरह प्रभावित करती है।
गौरतलब है कि अंतरिक्षयात्री अंतरिक्ष उड़ान के दौरान मांसपेशियों की कोशिकाओं के पुनर्जीवित होने की क्षमता खो देते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति अंतरिक्ष में जाता है, वहां गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण शरीर पर भार नहीं पड़ता। इसी वजह से मांसपेशियों में कमजोरी और गिरावट शुरू हो जाती है।
