उत्तराखंड में हर माह 9 तारीख को बजेगा भूकंप का सायरन, सांकेतिक चित्र, (फोटो साभार: freepik.com)
उत्तराखंड में भूकंप के प्रति आमजन को जागरूक करने और राज्य में स्थापित भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत लगाए गए सेंसर एवं सायरन की कार्यप्रणाली का नियमित परीक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अब प्रत्येक महीने की 9 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे राज्य में भूकंप का सायरन बजाया जाएगा।
उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी आमजन से अपील की है, कि सायरन की आवाज को ध्यान से पहचानें, ताकि वास्तविक भूकंप की स्थिति में चेतावनी को समझने में कठिनाई न हो। साथ ही परिवार के सदस्यों, बच्चों, बुजुर्गों तथा आसपास के लोगों को भी इस व्यवस्था के बारे में जानकारी दें।
उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी आमजन से अपील की है कि सायरन की आवाज को ध्यान से पहचानें, ताकि वास्तविक भूकंप की स्थिति में चेतावनी को समझने में कठिनाई न हो। परिवार के सदस्यों, बच्चों, बुजुर्गों तथा आसपास के लोगों को भी इस व्यवस्था के बारे में जानकारी दें।
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) October 7, 2026
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बुधवार देर शाम बैठक कर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के साथ इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य सचिव ने कहा, कि उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। राज्य का बड़ा भू-भाग भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील जोन चार एवं पांच में आता है। ऐसे में भूकंप के प्रति जागरूकता, पूर्व तैयारी और समय रहते चेतावनी प्राप्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, कि भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत स्थापित सायरन एवं सेंसर की नियमित जांच आवश्यक है, ताकि आपात स्थिति में यह प्रणाली पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सके।
उन्होंने कहा, कि नियमित परीक्षण के साथ-साथ राज्य में आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त संख्या में नए सायरन एवं सेंसर स्थापित किए जाने के निर्देश आपदा प्रबंधन विभाग को दिए गए हैं। नियमित परीक्षण से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा, कि किसी भी स्थान पर स्थापित सायरन सही स्थिति में हैं और आवश्यकता पड़ने पर समय से चेतावनी प्रसारित कर सकते हैं।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बताया, कि प्रत्येक माह की 9 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे बजने वाला सायरन प्रणाली के नियमित परीक्षण का हिस्सा होगा। इस दौरान यह जांच की जाएगी कि राज्य में स्थापित सायरन सही ढंग से कार्य कर रहे हैं या नहीं। यदि किसी स्थान पर सायरन के संचालन में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या पाई जाती है तो उसे तत्काल ठीक कराने की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, कि इस नियमित परीक्षण से तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान की जा सकेगी और वास्तविक आपदा के समय चेतावनी प्रणाली के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया, कि वर्तमान में उत्तराखंड राज्य में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत 169 सेंसर तथा 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। इन सेंसर के माध्यम से भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी की जाती है और निर्धारित प्रणाली के माध्यम से चेतावनी प्रसारित की जाती है।
उन्होंने बताया, कि यूएसडीएमए एवं आईआईटी रुड़की के सहयोग से भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली परियोजना के अंतर्गत और अधिक सेंसर स्थापित किए जाने का प्रस्ताव गतिमान है। अतिरिक्त सेंसर स्थापित होने से भविष्य में होने वाली भूकंपीय घटनाओं की निगरानी और चेतावनी प्रणाली की क्षमता में और सुधार होगा।
सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया, कि 6 अक्टूबर मंगलवार की रात्रि को आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.9 आंकी गई। भूकंप का केंद्र बिंदु चमोली जनपद में थराली के निकट लगभग 13 किलोमीटर की गहराई में था। इस भूकंप के दौरान आईआईटी रुड़की के सहयोग से संचालित भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से भूकंपीय तरंगों के आम जनमानस तक पहुंचने से पूर्व ही चेतावनी प्राप्त हुई।
उन्होंने कहा, कि भूदेव मोबाइल ऐप एवं स्थापित सायरन के माध्यम से लोगों को भूकंप की चेतावनी मिली। यह घटना भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली की उपयोगिता को रेखांकित करती है। भूकंप जैसी अचानक आने वाली आपदा में कुछ सेकंड की पूर्व चेतावनी भी लोगों को सुरक्षित स्थान लेने, गैस एवं विद्युत उपकरणों को बंद करने तथा आवश्यक सावधानी बरतने के लिए महत्वपूर्ण समय प्रदान कर सकती है।
सचिव ने बताया, कि इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य आम लोगों को भूकंप के सायरन के प्रति जागरूक करना भी है। सामान्य तौर पर लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि वास्तविक भूकंप की स्थिति में चेतावनी मिलने पर किस प्रकार का सायरन बजेगा।
हर माह निर्धारित समय पर सायरन बजने से लोगों को इसकी ध्वनि से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं, बल्कि जागरूक, सतर्क और तैयार करना है। नियमित परीक्षण के कारण आमजन को यह भी समझने में मदद मिलेगी कि भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली किस प्रकार कार्य करती है।
आपदा प्रबंधन सचिव ने आमजन से अपील की, कि भूदेव मोबाइल ऐप को अपने मोबाइल फोन में अपडेटेड वर्जन में इंस्टॉल/अपडेट रखें तथा ऐप को मोबाइल की लोकेशन की अनुमति हमेशा के लिए प्रदान करें, ताकि भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से संबंधित क्षेत्र के लिए जारी चेतावनी समय पर मोबाइल फोन तक पहुंच सके।
