पुरानी टिहरी घंटाघर
भिलंगना और भागीरथी नदी के संगम पर बसे प्राचीन टिहरी नगर ने भले ही बांध निर्माण परियोजना की खातिर करीब दो दशक पूर्व जल समाधी ले ली थी, लेकिन आज भी टिहरी नगर की समृद्ध संस्कृति और परंपरा पुराने नगरवासियो के ह्रदय में जीवित है।
प्रकृति और विकास के संतुलन की कीमत क्या होती है? इसका उत्तर शायद पुरानी टिहरी नगर में रहने वालो से बेहतर कोई और नहीं समझ सकता है। देश और प्रदेश के विकास के लिए जब टिहरी बांध परियोजना बनी, तो टिहरी शहर के हजारों परिवारों को अपना घर-बार, खेत-खलिहान और यादें छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था।
इनमें से बड़ी संख्या में परिवारों को डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के अठूरवाला क्षेत्र में बसाया गया। विकास की इस बड़ी कीमत के साथ टिहरी का ऐतिहासिक घंटाघर भी टिहरी झील के पानी में समा गया था।
जानकारी के अनुसार, प्राचीन टिहरी नगर की ऐतिहासिक विरासत और यादों को अब डोईवाला का अठूरवाला संजोएगा। बताया जा रहा है, कि अठूरवाला में लगभग 98 लाख रुपये की लागत से भव्य घंटाघर का निर्माण होने जा रहा है। इस घंटाघर को लेकर टिहरी विस्थापितों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला ने बताया, कि इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट के लिए जमीन का चयन कर लिया गया है। शासन से इसकी वित्तीय स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। टिहरी विस्थापितों की लंबे समय से मांग थी, कि उनकी सांस्कृतिक धरोहर को कहीं न कहीं स्थापित किया जाए। उनकी भावनाओं को देखते हुए उनके अथक प्रयासों से इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है।
विधायक गैरोला के मुताबिक, यह सिर्फ एक घंटाघर नहीं होगा, बल्कि इसके साथ-साथ एक भव्य म्यूजियम का निर्माण भी कराया जाएगा। इस म्यूजियम में टिहरी के इतिहास, संस्कृति, पुराने बर्तन, तस्वीरें और धरोहरों को संजोया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी टिहरी के गौरवशाली इतिहास को जान सके। जल्द ही इसका भूमि पूजन कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।