सांकेतिक चित्र
मोबाइल का सिम कार्ड रखने की अधिकतम सीमा के नियम पहले से प्रभावी हैं। अक्सर ऐसा होता है, कि लोग नकली आईडी पर सिम कार्ड खरीदकर इस्तेमाल करते हैं। कई बार लोग अपने सिम को किराए पर दे देते है या बेच देते है। अगर आप अपने सिम और पहचान पत्रों को लेकर लापरवाह हैं, तो आपको सावधान होने की जरुरत है।
दरअसल, दूरसंचार विभाग ने देश के नागरिकों के लिए एक बेहद जरूरी और सख्त चेतावनी जारी कर स्पष्ट किया है, कि सिम कार्ड या टेलीकॉम आइडेंटिफायर का गलत इस्तेमाल करने पर तीन साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना हो सकता है।
Department of Telecommunications cautions citizens against fraudulent issuance of #SIMCards, misuse of #telecom identifiers, or tampering with IMEI numbers.
It asks citizens not to share or transfer SIM cards issued in their name to others. @DoT_India also advises citizens to… pic.twitter.com/103B97bN0p
— All India Radio News (@airnewsalerts) September 21, 2026
यह कदम दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के तहत उठाया है। यह सख्त एडवाइजरी हाल ही में छत्तीसगढ़ में भंडाफोड़ हुए एक बड़े सिम धोखाधड़ी रैकेट के बाद जारी की गई है।
गौरतलब है, कि छत्तीसगढ़ में एक पीओएस एजेंट ने आम नागरिकों की जानकारी और सहमति के बिना, उनके पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके 25 मोबाइल कनेक्शन अवैध रूप से एक्टिवेट कर दिए थे। मामला सामने आते ही सरकार और टेलीकॉम कंपनियों ने मिलकर फौरन सख्त एक्शन लिया।
इसके अलावा धोखाधड़ी करने वाले पीओएस एजेंट को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया, ताकि वह भविष्य में कभी भी कोई सिम कार्ड न बेच सके। इन 25 अवैध मोबाइल नंबरों का पता लगाने के लिए दूरसंचार विभाग के अत्याधुनिक डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म की सहायता ली गई।
सिस्टम ने भी इन फर्जी नंबरों की संदिग्ध गतिविधियों को तुरंत पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान सभी संदिग्ध नंबरों का री-वेरिफिकेशन कराया गया और जो नंबर इस टेस्ट में फेल रहे, उन्हें तुरंत डीएक्टिवेट कर दिया गया।
दूरसंचार विभाग ने आगाह किया है, कि टेलीकॉम रिसोर्सेज का अनुचित उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की निजता के लिए बड़ा खतरा है। बता दें, नए कानून के तहत इन गतिविधियों को गंभीर अपराध माना गया है।
फर्जी दस्तावेजों पर सिम लेना अथवा किसी अन्य के नाम पर या नकली आईडी पर सिम कार्ड एक्टिवेट कराना। अपने सिम किराए पर देना या बेच देना। अगर उस नंबर से कोई क्राइम होता है, तो कानूनी जिम्मेदारी मूल मालिक की होगी। इसके साथ ही IMEI नंबर से छेड़छाड़ को भी गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
पुलिस ने भी नागरिकों से अपील की है, कि सिम लेते समय केवल अधिकृत केंद्र से ही वैध दस्तावेजों के साथ सिम प्राप्त करें। बता दें, कि शातिर अपराधी दूसरे राज्यों से सिम खरीदकर इनका उपयोग अपराध में कर रहे हैं। इन अवैध सिम कार्ड का उपयोग लॉटरी फ्रॉड, सेक्सटॉर्शन और अन्य ऑनलाइन वित्तीय घोटालों के लिए किया जा रहा है।
