BJP राज्यसभा प्रत्याशी दिनेश आर्य ने किया नामांकन
भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी दिनेश आर्य ने मंगलवार (6 अक्टूबर 2026) को विधानसभा में विधिवत अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उन्होंने विधानसभा के प्रभारी सचिव हेमचंद पंत को नामांकन पत्र सौंपा। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत मंत्री, सांसद और विधायक उपस्थित रहे।
भारत निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार, आज नामांकन दाखिल करने की आखिरी तिथि है। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर 2026 है। इसके बाद 16 अक्टूबर 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना की जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सोशल मीडिया (एक्स) पोस्ट में बताया, “विधानसभा, देहरादून में भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी दिनेश आर्य जी के नामांकन कार्यक्रम में सहभागिता की। दिनेश जी लंबे समय से संगठन के प्रति समर्पित एवं सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहे हैं।
विधानसभा, देहरादून में भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी श्री दिनेश आर्य जी के नामांकन कार्यक्रम में सहभागिता की।
दिनेश जी लंबे समय से संगठन के प्रति समर्पित एवं सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहे हैं। विश्वास है कि संगठन एवं जनसेवा के क्षेत्र में उनका दीर्घ अनुभव राज्यसभा में भी प्रदेश के हितों को प्रभावी ढंग से रखने में उपयोगी सिद्ध होगा।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) October 6, 2026
मुख्यमंत्री ने कहा, कि दिनेश आर्य बहुत सामान्य पृष्ठभूमि से आए। अनेक दायित्वों पर रहकर पार्टी के दिशा-निर्देश का हमेशा पालन किया। इनके राज्यसभा सांसद बनने से ये संदेश जाएगा, कि बीजेपी का एक आम कार्यकर्ता भी बड़े पद पर जा सकता है।
मीडिया से बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने कहा, कि दिनेश आर्य भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं। हमारे जिलाध्यक्ष रहे हैं। संगठन में बहुत लंबे समय से शानदार काम रहे हैं। उन्होंने कहा, कि समूचे राज्य, खास तौर पर पूरे कुमाऊं क्षेत्र में पार्टी की मजबूती में उनका बहुत बड़ा योगदान है।
बता दें, कि नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा हो रहा है और इसी सीट के लिए भाजपा ने दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाया है। दोनों मंडलों के बीच क्षेत्रीय संतुलन साधने के इस फैसले का एक दूसरा राजनीतिक संदर्भ भी है।
