सांकेतिक चित्र (फोटो साभार: freepik.com)
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 40 दिनों से जारी सैन्य संघर्ष के बाद आखिरकार 15 दिनों के लिए युद्धविराम का ऐलान कर दिया गया है। हालांकि सीजफायर की घोषणा के बाद भी खाड़ी क्षेत्र में हमले जारी है। दो सप्ताह के लिए घोषित हुए इस सीजफायर के बाद जंग में अमेरिका अपनी जीत का दावा कर रहा है, वहीं ईरान भी इसे अपनी जीत बता रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मैं ईरान पर बमबारी और हमले को दो सप्ताह की अवधि के लिए स्थगित करने पर सहमत हूं। यह एक द्विपक्षीय युद्धविराम होगा। हम पहले ही सभी सैन्य मकसदों को पूरा कर चुके हैं और हम ईरान के साथ लंबे समय के लिए शांति और मध्य पूर्व में शांति के लिए एक ठोस समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं।”
BREAKING – Trump says in call with @AFP tonight that Iran ceasefire deal is 'total and complete victory' for United States
Trump says he believes China was involved in pushing Iran to the negotiating table.
Says Iran's uranium will be 'perfectly taken care of' under the deal,…
— Danny Kemp (@dannyctkemp) April 8, 2026
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा के बाद कई देश राहत महसूस कर रहे है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर भी हामी भर दी है। बता दें, कि इस जंग के दौरान सबसे बड़ा खतरा तेल सप्लाई को लेकर दिखा, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम रूट पर भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है।
वहीं भारत ने ईरान-अमेरिका के बीच संघर्ष विराम का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। भारत सरकार ने कहा है, कि यह संघर्ष विराम क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा। भारत ने फिर दोहराया, कि तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के जरिए ही किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान निकल सकता है।
Statement on the recent development in West Asia ⬇️
🔗 https://t.co/WwFCi4kXHg pic.twitter.com/wmsF4YUb7j
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) April 8, 2026
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है, कि वॉइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने CNN को जानकारी दी है, कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से किए गए दो हफ्ते के सीजफायर का इजरायल भी हिस्सा है। अधिकारी ने बताया, कि इजरायल भी बातचीत जारी रहने तक बमबारी रोकने पर सहमत हो गया है।
गौरतलब है, कि अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर सैन्य ताकत वाला देश है। अमेरिका की सैन्य शक्ति ईरान की तुलना में कहीं अधिक और उन्नत है। जबकि ईरान 16वें स्थान पर आता है। हालांकि ईरान इस युद्ध में अपनी भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति के कारण अमेरिका के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहा। ईरान ने अमेरिका से सीधे टकराने के बजाए अलग-अलग तरीकों से पलटवार किया।
