सांकेतिक चित्र, (फोटो साभार: NDTV)
उत्तराखंड में बाघों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए है। दरअसल, हरिद्वार वन विभाग की श्यामपुर रेंज के जंगल में एक बाघ का शव मिलने से हड़कंप मच गया है। मृतक नर बाघ की उम्र लगभग दो वर्ष बताई जा रही है। वहीं बाघ के चारों पैर कटे होने की सूचना ने वन विभाग को भी सकते में डाल दिया है।
हरिद्वार वन विभाग के अनुसार, बीते रविवार शाम करीब 6:30 बजे श्यामपुर रेंज अंतर्गत सजनपुर बीट, श्यामपुर कम्पार्टमेंट संख्या 09 में सर्च ऑपरेशन के दौरान बाघ का शव बरामद हुआ। बाघ के चारों पैर कटे मिले, हालांकि उसकी खाल और दांत सुरक्षित पाए गए। मौके से एक मृत भैंस का शव भी बरामद किया गया है।
प्रारंभिक जांच में संभावना जताई जा रही है, कि बाघ को जहरीला पदार्थ देकर मारा गया और बाद में उसके पैर काट दिए गए। वन विभाग को वन गुर्जरों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मुखबिर द्वारा मिली थी। सूचना पर इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। यह भी संभावना व्यक्त की जा रही है, कि आरोपित रात के अंधेरे में बाघ की खाल उतारने और दांत निकालने की तैयारी में थे।
कार्रवाई के दौरान हरिद्वार वन विभाग की टीम ने आलम उर्फ फम्मी पुत्र शमशेर निवासी गुर्जर डेरा, श्यामपुर कम्पार्टमेंट संख्या 09 को गिरफ्तार किया है। वहीं, दूसरा आरोपी आमिर हमजा उर्फ मियां पुत्र मायी निवासी गुर्जर डेरा, श्यामपुर कम्पार्टमेंट संख्या 03 मौके से फरार बताया जा रहा है। उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वन गुर्जरों ने एक मृत भैंस को जंगल में डाल दिया। उसके बाद उसके ऊपर जहरीला पदार्थ छिड़का, फिर जैसे ही बाघ ने भैंस के मांस को खाया तभी उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने बाघ के चारों पैर काट दिए और उसे बाजार में बेचने की तैयारी कर रहे थे। आरोपित बाघ के क्षत विक्षत शव को जंगल में छोड़कर घर आ गए।
अगले दिन उन्होंने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई, लेकिन उससे पहले किसी ने वन विभाग को मामले की सूचना दे दी। वन विभाग की टीम ने जंगल से शव को बरामद कर लिया। साथ ही बाघ के चारों पैर भी बरामद कर लिए गए है। बाघ के दांत और खाल भी सुरक्षित पाई गई। इस मामले के सामने आने के बाद वन विभाग की निगरानी, गश्त और संरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे है।
गौरतलब है, कि अभी तक गुलदार या बाघ का शिकार करने में बाहरी और कुख्यात वन्यजीव तस्करों के नाम सामने आते रहे हैं, लेकिन पहली बार स्थानीय वन गुर्जरों द्वारा बाघ के शिकार करने की घटना के बाद वन विभाग की मुश्किलें बढ़ गई है।
डीएफओ हरिद्वार स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया, कि बाघ के शव को कब्जे में लेकर एनटीसीए प्रोटोकॉल के तहत पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, कि प्रथम दृष्टया मामला बेहद गंभीर प्रतीत हो रहा है और इसमें वन्यजीव अपराध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
