संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी, (फोटो साभार: ANI)
भारत ने पाकिस्तान के ‘नरसंहार के कलंकित इतिहास’ पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तीखी प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा, “पाकिस्तान का अमानवीय आचरण दशकों से अपनी आंतरिक विफलताओं को सीमा के भीतर और बाहर हिंसा के कृत्यों के जरिए बाहरी दुनिया पर थोपने के उसके प्रयासों को दर्शाता है।”
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक्स पोस्ट के अनुसार, वार्षिक यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में चर्चा के दौरान भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा दी है। दरअसल, UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने ये टिप्पणियाँ तब की, जब पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने बहस के दौरान जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया।
STORY | India calls out Pakistan’s ‘long-tainted record of genocidal acts’ at UNSC
India called out Pakistan’s “long-tainted” record of genocidal acts, telling the UN Security Council that the country’s inhuman conduct reflects its attempts over decades to externalise internal… pic.twitter.com/AdFxdaHKnN
— Press Trust of India (@PTI_News) May 21, 2026
राजदूत पर्वतनेनी ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमले का जिक्र करते हुए कहा, “नरसंहार के कृत्य को लंबे वक्त से दागदार रिकॉर्ड एक ऐसा पैटर्न दिखाता है, जिसमें पाकिस्तान अपनी सीमाओं के अंदर और बाहर हिंसा के जरिए अपनी अंदरूनी नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशश करता है।”
राजदूत पर्वतनेनी ने कहा, कि पाकिस्तान की तरफ से इस तरह की हरकतें किसी ऐसे देश के लिए हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए, जो अपने ही लोगों पर बम बरसाता है और सुनियोजित तरीके से नरसंहार करता है। उन्होंने कहा, ‘यह बेहद अजीब और हास्यास्पद है कि नरसंहार का पुराना और दागदार इतिहास रखने वाला पाकिस्तान आज उन मुद्दों पर बात कर रहा है, जो पूरी तरह से भारत के आंतरिक मामले हैं।
भारतीय राजदूत ने कहा, कि 1971 में ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान पाकिस्तान ने अपनी ही सेना द्वारा 4 लाख औरतों के साथ सुनियोजित तरीके से सामूहिक बलात्कार और नरसंहार का अभियान भी चलाया था।
पी. पर्वतनेनी ने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के हवाले से कहा, “हिंसा का यह कायरतापूर्ण और अनैतिक कार्य एक ऐसी सुविधा में 269 नागरिकों की मौत और 122 अन्य के घायल होने का कारण बना, जिसे किसी भी तरह से सैन्य लक्ष्य के रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता है।” उन्होंने पाकिस्तान के इस रवैये को पाखंडी करार दिया।
