दलेर मेहंदी पर भड़के कैबिनेट मंत्री, (फोटो साभार : @KumaonJagran)
टिहरी जिले के नरेंद्रनगर में आयोजित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान मशहूर पंजाबी सिंगर दलेर मेहंदी और राज्य के वन मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुई बहस चर्चा का विषय बन गई है। आरोप है, कि गायक कथित तौर पर वे शराब पीकर आयोजन में पहुंचे।
जानकारी के अनुसार, कुंजापुरी मेले में उसे समय हंगामा हो गया, जब कुछ लोगों ने दलेर मेहंदी पर नशे में होने का आरोप लगाया। इस पर कार्यक्रम में मौजूद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल भी भड़क गए। उन्होंने मंच पर गायक दलेर मेहंदी को रोका और उनसे पूछा, ‘आप ठीक से बोल भी नहीं पा रहे हैं, तो फिर गाएंगे कैसे?’
A video from the Kunjapuri Mela in Narendranagar, Tehri Garhwal, is drawing attention, showing Cabinet Minister and local MLA Subodh Uniyal objecting on stage during a performance by Punjabi singer Daler Mehndi.
In the video, Uniyal can be heard telling him, “Bol toh jaa nahi raha, gaana kya gaoge?”
— Kumaon Jagran (@KumaonJagran) October 19, 2026
दरअसल, बीते रविवार मेले की सांस्कृतिक संध्या के मुख्य आकर्षण दलेर मेहंदी थे और पंडाल में उनके प्रशंसकों का भारी हुजूम उमड़ा हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दलेर मेहंदी ने मंच पर आकर शुरुआत में एक-दो गाने गाए, लेकिन उसके ठीक बाद मंच पर उनके पीछे से किसी और की आवाज का साउंड (ट्रैक) आने लगा।
इस पूरे प्रकरण से स्थानीय जनता भड़क गई, जनता का साफ तौर पर कहना था, कि वे यहां सिर्फ और सिर्फ दलेर मेहंदी की लाइव आवाज सुनने आए थे, न कि पीछे से बजने वाला कोई नकली साउंड ट्रैक। वहीं मुख्य अतिथि व कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने खुद मंच पर जाकर सीधे दलेर मेहंदी के सामने अपनी तीखी नाराजगी व्यक्त की।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने मंच पर खड़े होकर ही कहा, “यह मां दुर्गा की आराधना और नवरात्र का धार्मिक आयोजन है। पावन अवसर पर शराब के नशे में कार्यक्रम प्रस्तुत करना उचित नहीं है। आप शराब पीकर गाना गा रहे हैं। यह ठीक नहीं है। आपसे बोला तो जा नहीं रहा है, गाना क्या गाएंगे।”
गौरतलब है, कि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और चर्चा का एक बड़ा विषय बन गया है। कई लोगों ने मंत्री के हस्तक्षेप का समर्थन किया है और कहा है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान मर्यादा बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी था। कुंजापुरी मेला धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
