सांकेतिक चित्र, (फोटो साभार: freepik.com)
राजधानी देहरादून स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उस वक्त असमंज की स्थिति बन गई, जब एक प्रसूता के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर बच्चा बदलने का आरोप लगाया। इस दौरान मौके पर जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने अस्पताल के महिला एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष से मामले में जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, दून अस्पताल में 3 महीने के भीतर नवजात बदलने के दूसरा मामला सामने आया है। बीते सोमवार को प्रसव के बाद प्रसूता के परिजनों को पहले बेटा होने की जानकारी दी गई, लेकिन बाद में चिकित्सकों ने बेटी होने की बात बताई। इससे नाराज स्वजन ने अस्पताल में करीब 2 घंटे तक हंगामा किया।
प्रसूता के पति यशपाल राणा का कहना है, कि पेट में दर्द होने पर वह अपनी पत्नी को पहले मोरी के स्थानीय अस्पताल में लेकर गए थे, लेकिन वहां उन्होंने बच्चे के उल्टा होने की बात कहकर रेफर कर दिया। घंटो तक यात्रा करने के बाद वह देहरादून पहुंचे थे। आरोप है, कि स्वास्थ्यकर्मियों ने उनका बच्चा बदल दिया।
वहीं अस्पताल प्रबंधन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बैठाई है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है, कि परिजनों को इस मामले में गलतफहमी हुई है। दस्तावेज में बेटी ही दर्ज की गई है। शुरूआती जानकारी में किसी स्वास्थ्यकर्मी की ओर से बधाई लेने के लिए परिजनों को बेटे की जानकारी दी गई। प्रबंधन ने इसे बेहद शर्मनाक बताया है।
जानकारी के अनुसार, परिजनों को बेटा होने की सूचना देने वाली महिला रेडियोलाॅजी की जांच करने वाली एजेंसी की कर्मचारी बताई जा रही है। शुरुआती जांच के आधार पर संबंधित एजेंसी को नोटिस देकर कर्मचारी पर कार्रवाई की संस्तुति की गई है। उधर परिजनों से भी वार्ता की गई है और वे अब संतुष्ट है।
बता दें कि करीब दो महीने पहले अगस्त माह में प्रेमनगर निवासी सुमित ने पत्नी नीरज की डिलीवरी के बाद बच्चा बदलने की आशंका जताई थी। उनका कहना था, कि पर्चे पर बेबी बॉय दर्ज था, जबकि बाद में उन्हें बेटी होने की जानकारी दी गई। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक उस मामले की रिपोर्ट नहीं आई है।
