होमस्टे योजना के रजिस्ट्रेशन नियमों में बदलाव
उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने पर्यटन गतिविधियों से जुड़े रजिस्ट्रेशन नियमों में बदलाव किये है। नियमावली में होमस्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम को भी मर्ज किया गया है। इसके साथ ही अब से ट्रैवल एंड ट्रेड रजिस्ट्रेशन में पर्यटन से जुड़ी प्रत्येक व्यावसायिक गतिविधि का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि, इससे पूर्व होमस्टे योजना बाहर थी।
जानकारी के अनुसार, ट्रैवल एंड ट्रेड रजिस्ट्रेशन में होटल, मोटल, साहसिक गतिविधियां, टेंट कॉलोनी, स्पा, हेल्थ रिजॉर्ट इत्यादि सबको वन टाइम रजिस्ट्रेशन करवाना होता था, लेकिन अब प्रत्येक पांच वर्ष में इसको रिन्यू भी करना होगा। अभी तक होमस्टे को इससे बाहर रखा गया था, लेकिन अब होमस्टे और केंद्र सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी को भी इसमें जोड़ा गया है।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद अपर निदेशक पूनम चंद के मुताबिक, “राज्य प्रदेश में वर्तमान में 6000 होमस्टे पंजीकृत है। इसमें सबसे अधिक होमस्टे नैनीताल में संचालित हो रहे है। जबकि दूसरे नंबर पर देहरादून और तीसरे स्थान पर पिथौरागढ़ है। होमस्टे योजना के फीडबैक को देखें, तो होमस्टे योजना शहरी क्षेत्र में ज्यादा लोकप्रिय हो रही है, जबकि इसका वास्तविक उदेश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधि को बढ़ाना है।
इसीलिए इस योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए इसे ग्रामीण क्षेत्र में फोकस करते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि उत्तराखंड की ग्रामीण संस्कृति और क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और ऐसा हो नहीं रहा था। इस योजना में जो सरकारी लाभ दिया जाता है, उसका फायदा उठाते हुए बाहरी लोग केयरटेकर रखकर होमस्टे चला रहे थे, जो कि इस योजना के वास्तविक उद्देश्य को पूरा नहीं कर रहा था।
इसके लिए अब होमस्टे योजना को अलग किया गया है, जो कि ग्रामीण क्षेत्रों में लागू रहेगी। वहीं शहरी क्षेत्र और व्यावसायिक पर्यटन के लिए बेड एंड ब्रेकफास्ट जो कि केंद्र सरकार की एक अहम योजना है, उसको प्रदेश में लागू करवाया गया है। होमस्टे योजना का उद्देश्य गांव की आबो-हवा और माहौल प्रदान का पर्यटक को स्थानीय संस्कृति से परिचित कराना था।
लेकिन हो ये रहा था, कि बाहर से आने वाले लोग उत्तराखंड में इन्वेस्ट कर रहे थे। इसके अलावा जिस तरह से इस होमस्टे योजना में बिजली और अन्य कई तरह के कमर्शियल टैक्स में छूट दी जाती है, उनका लाभ बाहर के लोग उठा रहे थे। इससे प्रदेश को राजस्व के रूप में भी हानि हो रही थी।
अपर निदेशक पूनम चंद के अनुसार, उत्तराखंड का मूल निवासी इस योजना से जुड़ नहीं पा रहा था, इसलिए इसको बदलकर अब होमस्टे योजना के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है, कि यह केवल राज्य के स्थाई निवासी के लिए उपलब्ध होगी। जिस घर में वह स्वयं रहता है और खुद होमस्टे संचालित करे। उसी को होमस्टे के अंतर्गत रजिस्टर कराया जाएगा।
इसी क्रम में यदि केयरटेकर के माध्यम से होमस्टे चलाया जा रहा है, तो उसे होमस्टे योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसे बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम के तहत रजिस्टर्ड करना होगा। इन दोनों योजनाओं में छोटे आवासीय स्पेस की जरूरत होती है। बता दें, कि उत्तराखंड में सभी होटलों को पर्यटन विभाग की टूर एंड ट्रैवल पॉलिसी में खुद को रजिस्टर करना अनिवार्य होता है।
होटल नया खुलता है, तो उसे अनिवार्य रूप से अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। उद्योग विभाग के साथ यदि किसी योजना के लाभ लेना है, तो उसे योजना का लाभ भी तभी मिल पाता है, जब पर्यटन विभाग में अपने होटल व्यवसाय का पंजीकरण कराया जाता है।
