सांकेतिक चित्र
बहुचर्चित इरम मर्डर केस में बुधवार (18 मार्च 2026) को नैनीताल कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। जिला न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कुलदीप शर्मा की कोर्ट ने आरोपी मोहम्मद गुलजार को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील शर्मा ने बताया, कि जनपद नैनीताल के तल्लीताल थाना क्षेत्र में मृतका इरम की बहन फरहीन वारसी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मृतका की बहन ने अपनी शिकायत में बताया था, कि 1 अगस्त 2023 को आरोपी गुलजार, जो पहले से शादीशुदा और तीन बच्चों का बाप है, इरम खान को नौकरी दिलाने के बहाने नैनीताल लाया था।
इरम और गुलजार नैनीताल के एक होटल में रूके थे, जहां गुलजार ने इरम को जहर देकर मौत के घाट उतार दिया था। फरहीन वारसी का कहना था, कि गुलजार उसकी बहन पर मुरादाबाद के मुगलपुरा थाने में दर्ज मुकदमे को वापस लेने का दबाव बना रहा था और इसी साजिश के तहत उसने हत्या की वारदात को अंजाम दिया।
प्रकरण में जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा द्वारा अदालत में 13 गवाह पेश किए। पोस्टमॉर्टम और विसरा रिपोर्ट से पुष्टि हुई, कि इरम की मौत एल्युमिनियम फॉस्फाइड जहर से हुई थी। अदालत में यह भी सिद्ध हुआ, कि गुलजार ने इरम को बदनाम करने के लिए आपत्तिजनक वीडियो भी वायरल किए थे और एक फर्जी निकाहनामा भी तैयार किया था।
अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने बताया, कि वारदात को अंजाम देने के बाद गुलजार फरार हो गया था, जिसे 19 अगस्त 2023 को गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने आरोपी को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने व धारा 201 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
अपने फैसले में कोर्ट ने यह भी आदेश दिए है, कि जुर्माने की राशि में से 15 हजार रुपए मृतका की मां को दिए जाएं और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के माध्यम से उत्तराखंड अपराध पीड़ित मुआवजा योजना 2013 के तहत भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
