(फोटो साभार: Enable Connect Consulting)
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक सराहनीय और जीवन रक्षक प्रयास के तहत हरिद्वार के पास हुई सड़क दुर्घटना के बाद सांस की नली में आई एक दुर्लभ व अत्यंत गंभीर चोट से पीड़ित 45 वर्षीय महिला का सफलतापूर्वक इलाज किया।
जानकारी के अनुसार, स्कूल टीचर पूनम एक मोटरसाइकिल पर पीछे बैठी थी, जब उनका दुपट्टा बाइक के पहिए में फंस गया, जिससे उनकी गर्दन जोर से खिंच गई और उन्हें बेहद गंभीर अंदरूनी चोटें आईं। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। जहां महिला की हालत अत्यधिक बिगड़ने के कारण उन्हें बेहतर और विशेष उपचार के लिए देहरादून स्थित मैक्स हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया।
मैक्स हॉस्पिटल पहुंचने पर डॉक्टरों ने चिंताजनक संकेत देखे, जिसमें सिर और गर्दन में चोटें, त्वचा के नीचे बड़े पैमाने पर हवा का फंसना, और सीने में हवा का रिसाव शामिल था, जो गंभीर एयरवे चोट का संकेत दे रहा था। अगले 24 घंटों में महिला को सांस लेना और भी मुश्किल हो गया, जिससे मेडिकल टीम को समय के खिलाफ दौड़ लगानी पड़ी।
नुकसान की सीमा के कारण मरीज के एयरवे को सुरक्षित करना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था। एक विस्तृत सीटी स्कैन ने पुष्टि की, कि मरीज की विंडपाइप लगभग पूरी तरह से फट गई थी, यह एक दुर्लभ चोट है, जिसका अगर तुरंत इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।
डॉ. अरविंद मक्कर, डायरेक्टर (कार्डियक, थोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी) मैक्स हॉस्पिटल, देहरादून के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने फटी हुई विंडपाइप की मरम्मत के लिए एक इमरजेंसी सर्जरी की, जिसमें डॉ. इरम खान, सीनियर कंसल्टेंट- ईएनटी सर्जरी भी शामिल थे।
इस मामले पर बात करते हुए डॉ. अरविंद मक्कर ने कहा, “शुरुआती रिकवरी के बाद, मरीज के गले में सूजन आ गई और सीने के एक तरफ हवा का रिसाव होने लगा, जिससे फिर से उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। हमारी टीम ने तुरंत उसकी हालत स्थिर की और विस्तृत मेडिकल परिक्षण किये, जिससे पुष्टि हुई, कि विंडपाइप की मरम्मत सही थी।
उन्होंने बताया, कि ठीक हो रहे एयरवे को सुरक्षित रखने और मरम्मत किए गए हिस्से पर दबाव डाले बिना सूजन को कम होने देने के लिए हमने एक अस्थायी ट्रेकियोस्टोमी (एक सर्जिकल प्रक्रिया जिसमें ऊपरी एयरवे रुकावटों को बायपास करने के लिए विंडपाइप में एक छोटा सा छेद किया जाता है) की। यह कदम सुरक्षित सांस लेने और सुचारू रिकवरी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण था।
डॉ. अरविंद ने कहा, “विंडपाइप में चोट लगना अत्यंत दुर्लभ होता है और यदि इसे तुरंत पहचाना और इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा हो सकता है। इस मामले में एयरवे लगभग पूरी तरह से फट गया था, जिससे डायग्नोसिस और एयरवे मैनेजमेंट दोनों ही बहुत मुश्किल हो गए थे।”
उन्होंने बताया, कि यह नतीजा सिर्फ़ तेज़ी से फैसले लेने, एडवांस्ड सर्जिकल इंटरवेंशन और कई स्पेशलिटीज़ के बीच करीबी तालमेल की वजह से ही संभव हो पाया। मरीज़ को ठीक होते और अपनी सामान्य ज़िंदगी में लौटते देखना पूरी टीम के लिए बहुत संतोषजनक है।

