ऋषिकेश में दोबारा सी प्लेन की सफल लैंडिंग, (फोटो साभार: (X@ETVBharatUK)
देवभूमि उत्तराखंड स्थित ऋषिकेश के गंगा बैराज जलाशय में आज दूसरी बार 19-सीटर सी-प्लेन का ट्रायल सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्काई हॉप कंपनी के इस विमान ने न केवल गंगा की लहरों को छुआ, बल्कि विपरीत धारा के बावजूद अपनी ताकत का लोहा मनवाया।
जानकारी के मुताबिक, आज का ट्रायल तकनीकी दृष्टि से बेहद अहम रहा। सी-प्लेन ने गंगा की मुख्य धारा और विपरीत धारा में दो बार शानदार टेक-ऑफ और लैंडिंग की। विमान ने दो बार पानी से उड़ान भरी और उतनी ही सुगमता से लैंडिंग की। नदी की विपरीत दिशा में सफल संचालन ने यह साबित कर दिया, कि यह तकनीक ऋषिकेश की भौगोलिक स्थितियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और सटीक है।
इस अवसर पर पुलिस, SDRF, फायर ब्रिगेड और UJVNL के साथ ही प्रशासन की टीमें तैनात रही और सी-प्लेन का ट्रायल सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच अंजाम दिया गया। आर्थिकी के विशेषज्ञों का मानना है, कि यह सेवा शुरू होने से विदेशी और उच्च वर्ग के अमीर पर्यटक सीधे ऋषिकेश के केंद्र तक पहुंच सकेंगे।
यह पहल न केवल हाई एंड टूरिज्म को बढ़ावा देगी, बल्कि आपातकालीन स्थिति में राहत और बचाव कार्यों के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी। सी-प्लेन (Seaplane) की सेवा यदि क्षेत्र में शुरू होती है, तो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए यात्रा ज्यादा तेज, सुविधाजनक और आकर्षक बनेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा टैक्सी संचालकों, गाइड्स और स्थानीय बाजार के लिए यह योजना मील का पत्थर साबित होगी। जौलीग्रांट से बैराज तक का सफर अब मिनटों में तय होगा। जिससे ट्रैफिक की समस्या से भी निजात मिलेगी। प्रोजेक्ट मैनेजर मनीषा झा ने बताया, कि ऋषिकेश बैराज डैम में सी प्लेन की सफल ट्रायल हुआ है। इसके साथ ही टिहरी झील में भी यह ट्रायल जल्द किया जाएगा।
बता दें, कि सी-प्लेन एक विशेष विमान है, जो पानी की सतह नदियों, झीलों या समुद्र से उड़ान भर सकता है और वहीं लैंड भी कर सकता है। सामान्यतौर पर यह 12 से 19 सीटों वाला छोटा विमान होता है। इसे टेक-ऑफ करने के लिए मात्र 300-500 मीटर के जलाशय की आवश्यकता होती है। साथ ही ये विमान जमीन और पानी दोनों जगह उतरने में सक्षम होते हैं।
