
CM धामी ने सावन के पहले सोमवार पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की
देवाधिदेव महादेव को समर्पित सावन के महीने के पहले सोमवार पर देवभूमि उत्तराखंड स्थित शिवालयों में सुबह से जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। शिव भक्त गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और पंचामृत से भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं। सावन के प्रथम सोमवार के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की।
मुख्यमंत्री धामी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने संदेश में लिखा, “देवाधिदेव महादेव का सम्पूर्ण विधि-विधान से पूजन-अर्चन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सीएम धामी ने बेलपत्र और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक कर भगवान शिव से समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं राज्य की उन्नति के लिए प्रार्थना की।
इस शुभ अवसर पर भगवान शिव से समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं राज्य की उन्नति के लिए प्रार्थना की।#सावन_सोमवार pic.twitter.com/q44KIskYll
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 14, 2025
सावन महीने के पहले सोमवार को पूरे देश में विशेषकर देवभूमि उत्तराखंड में भारी उत्साह देखा जा रहा है। शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी है। हरिद्वार, केदारनाथ, ऋषिकेश और जागेश्वर जैसे प्रसिद्ध शिवधामों में आज भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा है।
हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर समेत अन्य शिवालयों में भी भोले के भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए पहुंचे हुए हैं। भगवान शिव की ससुराल कनखल के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में तो प्रातः काल से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी हुई है। सावन माह का पहला सोमवार होने के चलते बड़ी संख्या में शिवभक्त भगवान शंकर का जलाभिषेक करने आ रहे हैं।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सावन या श्रावण मास में जो भक्त भगवान शिव की भक्ति पवित्र मन से करते है, उसकी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती है। इसके साथ ही कन्याओं को सुयोग्य वर प्राप्ति का भी आशीर्वाद मिलने की मान्यता है। श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर जल जरूर चढ़ाना चाहिए।
इस महीने पुष्प, फल और बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ अति प्रसन्न होते है। जल चढ़ाने से पहले पंचामृत अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। इस माह में दूध का दान करने से भी भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते है। इस माह में गाय और बैल की सेवा करना भी उत्तम माना गया है। श्रावण मास में व्रत-उपवास करने से भी भोलेनाथ को प्रसन्न होते है।
भगवान भोलेनाथ के साथ भक्तों को माता पार्वती की भी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस माह में धन, धतूरा, दूध, आक, गंगा जल, और बेल पत्र आदि भगावन शिव को अर्पित करना चाहिए। सावन में रोज 21 बेलपत्र पर चंदन से ‘ॐ नम: शिवाय’ लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
भगवान शिव को समर्पित इस महीने को अत्यधिक पवित्र माना जाता है। इस माह में कई धार्मिक अनुष्ठान किए जाते है। श्रावण मास भक्ति, हरियाली और प्रेम का प्रतीक होता है। सावन के महीने में दिन के समय नहीं सोना चाहिए। माना जाता है, कि इससे भोलेनाथ की कृपा नहीं मिलती है। सावन के महीने में भूलकर भी मांस, मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस महीने तामसिक भोजन के सेवन से भक्तों को पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है।