सांकेतिक चित्र
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित मॉल के बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में डूबकर युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में यूपी सरकार ने नोएडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लोकेश एम को हटा दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। एसआईटी का नेतृत्व एडीजी जोन मेरठ करेंगे। उनके साथ मंडलायुक्त मेरठ और पीडब्ल्यूडी विभाग के चीफ इंजीनियर को भी टीम में शामिल किया गया है।
जांच टीम को हादसे के कारणों, संबंधित विभागों की भूमिका, लापरवाही की जिम्मेदारी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों की विस्तृत पड़ताल करने के निर्देश दिए गए है। SIT पाँच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। जबकि जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएँ पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं।
इसके अलावा संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। एसआईटी क्षेत्र में जल-निकासी व्यवस्था, सड़क निर्माण की गुणवत्ता, चेतावनी संकेतों की मौजूदगी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की भी जांच करेगी।
गौरतलब है, कि 27 वर्षीय युवराज की कार जलभराव के दौरान एक गहरे गड्ढे/अंडरपास में फँस गई थी। इस हादसे में उनकी जान चली गई। युवराज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण दम घुटना बताया गया। उनके फेफड़ों में करीब साढ़े तीन लीटर पानी भरा हुआ पाया गया, जिससे साबित होता है, कि वह काफी देर तक पानी में डूबे रहे।
