सुप्रीम कोर्ट (फोटो साभार: etvbharat)
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को WhatsApp और Meta को उसकी प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है, कि भारत के नागरिकों के निजी डेटा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, कि ये प्राइवेसी पॉलिसी शोषणकारी और गुमराह करने वाली है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया, कि व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी ‘शोषणकारी’ है, क्योंकि यह न केवल यूजर्स का डेटा शेयर करती है बल्कि उसे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल भी करती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बेहद कठोर शब्दों में कहा, ‘अगर हमारे संविधान का पालन नहीं कर सकते तो भारत छोड़कर जाइए।’
देश की सर्वोच्च अदालत ने प्राइवेसी पॉलिसी पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा है, कि डेटा शेयरिंग के नाम पर नागरिकों के निजता अधिकार से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी इस याचिका में एक पक्ष बनाने का निर्देश दिए है।
चीफ जस्टिस सूर्याकांत ने वाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी की भाषा पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कंपनी के वकीलों से पूछा, “क्या बिहार या तमिलनाडु के किसी दूर-दराज गाँव में रहने वाला शख्स आपकी इस कठिन भाषा को समझ पाएगा? अथवा सड़क पर फल बेचने वाली एक गरीब महिला या घर में काम करने वाली बाई क्या आपकी शर्तों को समझ सकती है?”
CJI: a person sitting in remote village in Bihar…
Rohatgi: we had given newspaper ads earlier, anyways…that means in the interim, you allow the appeal, the law says I have to come back in 18 months
Counsel; this act is not in force, it will be in May 2027
— Live Law (@LiveLawIndia) February 3, 2026
चीफ जस्टिस ने कहा, कि आपकी पॉलिसी की भाषा इतनी कुटिलता से लिखी गई ,है कि हम में से भी कुछ लोग उसे नहीं समझ पाते। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, “आपने करोड़ों लोगों का डेटा ले लिया होगा। यह निजी जानकारी की चोरी करने का एक शालीन तरीका है। हम इसे इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देंगे।”
वही कंपनियों का कोर्ट में पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अखिल सिब्बल ने कहा, कि WhatsApp मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित होते हैं और कंपनी उन्हें पढ़ नहीं सकती। हालांकि अदालत ने साफ कर दिया, कि यूजर्स की प्राइवेसी सर्वोपरि है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा।
Meta ने डेटा उपयोग से जुड़े पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने पर सहमति जताई है। कोर्ट ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई अगले सप्ताह तक टाल दी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी मामले में पक्षकार बनाया है। अब सबकी निगाहें 9 फरवरी पर टिकी हैं, जब कोर्ट इस मामले में अपना अंतरिम फैसला सुनाएगा।

