जंगली सूअर, (फोटो साभार: X@currentbokaro
उत्तराखंड में तेंदुआ और भालू के हमले के साथ ही अन्य जंगली जानवर फसलों को भारी नुकसान पंहुचा रहे हैं जो किसानों के लिए समस्या बनी हुई है। राज्य में बंदर, नीलगाय और जंगली सूअर पहाड़ों की खेती बर्बाद कर रहे हैं। किसानों की फसलों को जंगली जानवरों से हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए वन विभाग ने एक अहम फैसला लिया है।
जानकारी के अनुसार, जंगली सूअर या नीलगाय की ओर से लगातार फसलों को नुकसान पहुंचाने की शिकायतों के बीच अब इन्हें मारने की सशर्त अनुमति देने के आदेश जारी किए गए है। हालांकि, यह अनुमति पूरी तरह नियंत्रित प्रक्रिया और तय मापदंडों के अंतर्गत ही दी जाएगी। हालांकि इसके लिए प्रभावित किसान को पहले निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा यह अधिकार विभाग के कई अधिकारियों को सौंपा गया है। क्षेत्रीय वन संरक्षक, प्रभागीय वनाधिकारी, सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्राधिकारी, उप वन क्षेत्राधिकारी और वन दारोगा को प्राधिकृत अधिकारी बनाया गया है। ये अधिकारी तय शर्तों के आधार पर अनुमति प्रदान कर सकते हैं।
शासन द्वारा आदेश के मुताबिक, जंगली सूअर या नीलगाय को केवल वन क्षेत्र के बाहर निजी खेती की भूमि पर ही मारा जा सकेगा। यदि जानवर घायल होकर वन क्षेत्र की ओर भागता है, तो उसका पीछा करते हुए वन क्षेत्र के भीतर जाना प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा मृत जानवर को वनरक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधि की उपस्थिति में नष्ट किया जाएगा।
जंगली सूअर या नीलगाय को मारने की अनुमति प्राप्त करने के लिए प्रभावित किसान को प्राधिकृत अधिकारी के पास निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा। आवेदन पर स्थानीय ग्राम प्रधान की संस्तुति भी अनिवार्य होगी। साथ ही वन्यजीव को मारने के लिए केवल लाइसेंसी बंदूक का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।
आदेश में ये भी स्पष्ट किया गया है, कि अनुमति जारी होने की तारीख से केवल एक महीने तक ही वैध होगी। एक महीना पूरा होने के बाद अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
