प्रतीकात्मक चित्र
टिहरी जिले में सर्दी से बचने के लिए कमरे के अंदर जलाई अंगीठी का धुआं मासूम की जान पर भारी पड़ गया। इस दर्दनाक हादसे में अंगीठी के धुएं से कथित तौर पर चार वर्षीय बच्ची की दम घुटने से मौत हो गई। जबकि, बच्ची की मां गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां चिकित्सकों ने महिला को हायर सेंटर एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया।
जानकारी की अनुसार, नई टिहरी स्थित सीआईएसएफ कॉलोनी में ठंड से बचने के लिए जलाई गयी अंगीठी के धुएं से दम घुटने के कारण 4 साल की बच्ची की मौत हो गयी। वहीं उसकी मां गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। पुलिस ने बीते रविवार को घटना के संबंध में जानकारी देते हुए बताया, कि घटना शुक्रवार रात घटित हुई है।
शनिवार सुबह 10 बजे तक जब सीआईएसएफ के सिपाही गणेश पालवे के घर का दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों ने आवाज लगाई, इस पर घर के अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद लोगों ने पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने कमरे का दरवाजा तोड़ा। घर के अंदर 4 साल की आर्या और 37 वर्षीय मोनिका अचेत अवस्था में मिली।
इसके बाद पुलिस टीम दोनों को जिला अस्पताल लेकर पहुंची। जहां डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। जबकि बच्ची की माँ को उपचार के लिए हायर सेंटर एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया। पुलिस ने बताया, कि महाराष्ट्र के अहमदनगर निवासी गणेश पालवे घटना के समय मौजूद नहीं थे। वह सेहत खराब होने के कारण इलाज के लिए देहरादून गए हुए थे।
पुलिस के मुताबिक, कमरे की तलाशी लेने पर वहां कोई विषाक्त पदार्थ या कोई पत्र नहीं मिला। कमरे में केवल अंगीठी ही रखी हुई मिली। ऐसे में संभावना जताई जा रही है, कि घर में अंगीठी का धुआं भर गया होगा और दम घुटने से बच्ची की मौत हुई होगी। पुलिस ने बताया, कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारण का पता चल पाएगा।
बता दें, कि ठंड से निजात पाने के लिए बंद कमरे में अंगीठी का प्रयोग कई दफा जानलेवा साबित हो जाता है। कोयलों को जलाने पर कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस पैदा होती है। ये जहरीली गैस शरीर के हीमोग्लोबिन से ऑक्सीजन को विस्थापित करके दम घोंट सकती है, जिससे सिरदर्द, चक्कर आना और गंभीर मामलों में मृत्यु हो सकती है, इसलिए इसे ‘दम घोंटू गैस’ भी कहते है।
इससे बचने के लिए अंगीठी जलाते समय कमरे के दरवाजे और खिड़कियां खुली रखे। किसी भी परिस्थिति में बंद कमरे में अंगीठी जलाकर नहीं रखें और जलती अंगीठी कमरे में रखकर सोएं नहीं। सोने से पहले अंगीठी को बाहर रख दें। अंगीठी को बाहर रखेंगे, तो उससे निकलने वाली कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस कमरे में इकट्ठा नहीं होगी।
