कानपुर पुलिस ने किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का किया भंडाफोड़, (फोटो साभार: X@kanpurnagarpol)
उत्तर प्रदेश के कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है, कि कुछ प्राइवेट अस्पतालों में 9 लाख में किडनी खरीदकर 90 लाख में बेची जाती थी। यह पूरा मामला तब सामने आया, जब किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद डोनर (किडनी देने वाले) को बकाया रकम नहीं दी गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गिरोह में कानपुर के कई अस्पताल शामिल थे, जिनमें प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल का प्रमुख रूप से नाम सामने आया है। जबकि डॉ. अफजल, डॉ. रोहित, डॉ. वैभव और डॉ. अनुराग इस रैकेट के मुखिया थे। वहीं, डॉ. सुरजीत और उनकी पत्नी आहूजा हॉस्पिटल के मालिक थे, जहाँ ये ऑपरेशन किए जाते थे।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने मामले में जानकारी देते हुए बताया, कि आयुष ने मेरठ निवासी पेशे से डॉक्टर अफजाल से संपर्क किया, जो किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट से जुड़ा हुआ था, उसे 6 लाख में किडनी देने की बात कही। इसके बाद अफजाल ने आगे संपर्क किया, जहां शिवम से उसकी बात हुई। शिवम ने आहूजा अस्पताल से संपर्क करवाया।
थाना-रावतपुर व सर्विलांश टीम पश्चिम जोन की संयुक्त कार्यवाही..
कानपुर नगर में किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा, 6 गिरफ्तार रैकेट में शामिल अन्य 04 की तलाश जारी..कमिश्नरेट कानपुर नगर में अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में पुलिस को एक बड़ी सफलता प्राप्त हुई है।… pic.twitter.com/RvWGLfPUz5
— POLICE COMMISSIONERATE KANPUR NAGAR (@kanpurnagarpol) March 31, 2026
जिसके बाद आयुष की किडनी ट्रांसप्लांट कराई गई। बताया जा रहा है, कि किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद किडनी डोनर आयुष को बकाया रकम नहीं दी गई। जिससे नाराज आयुष ने पुलिस कमिश्नर से मामले की शिकायत कर दी। शिकायत के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मामले की जांच की। जिसके बाद कानपुर में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कानपुर में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट मामले में अब तक छह आरोपी गिरफ्तार किये जा चुके है। आरोपियों में डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीती आहूजा, डॉ. राजेश कुमार, एंबुलेंस ड्राइवर शिवम अग्रवाल, डॉ. राम प्रकाश और डॉ. नरेंद्र सिंह शामिल हैं। मामले में चार मुख्य आरोपी डॉक्टर व स्टाफ अभी फरार चल रहे है।
एंबुलेंस ड्राइवर शिवम अग्रवाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को फँसाता था। वह खुद को मेडिकल मदद दिलाने वाला बताता था और कहता था, कि किसी मरीज के रिश्तेदार को किडनी की जरूरत है। शिवम ने पूछताछ के दौरान बताया है, कि आहूजा अस्पताल में पिछले कुछ महीनों में सात से आठ किडनी ट्रांसप्लांट हुये हैं।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया, कि आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए देर रात का समय निर्धारित किया जाता था। जिससे सर्जरी के बाद किडनी रोगी व डोनर को शिफ्ट करना आसान रहता था। साथ ही किडनी प्रत्यारोपण वाले दिन पूरे स्टाफ को छुट्टी दी जाती थी। बताया जा रहा है, कि ये गिरोह 9 लाख में किडनी ख़रीदकर उसे 90 लाख तक में बेच देते थे।
