केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, (फोटो साभार: जागरण) फाइल चित्र
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति ‘PRAHAAR’ जारी की है। इसे आतंकवाद से निपटने को लेकर दीर्घकालिक प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ‘प्रहार’ नीति सीमा पार आतंकवाद, ड्रोन हमलों और संगठित आतंकी नेटवर्क समेत जटिल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक संरचित राष्ट्रीय ढांचा प्रस्तुत करती है।
सोमवार (23 फरवरी 2026) को गृह मंत्रालय ने कहा, कि CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव, डिजिटल) सामग्री तक पहुंचने और उसका इस्तेमाल करने की आतंकवादी कोशिशों को बाधित करना और रोकना भारत में आतंकवाद विरोधी (CT) एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है।
Union Ministry of Home Affairs today released India's first National Counter-Terrorism Policy and Strategy. The counter-terrorism strategy of India, ‘PRAHAAR’, flows from these ideals and is predicated on the following: Prevention of terror attacks to protect Indian citizens and…
— ANI (@ANI) February 23, 2026
यह भी बताया गया, कि सरकारी और गैर-सरकारी कारकों द्वारा ड्रोन और रोबोटिक्स का खतरनाक उद्देश्यों के लिए गलत इस्तेमाल करने का खतरा भी चिंता का विषय है। साथ ही दस्तावेज आतंकवाद को किसी धर्म, जातीयता, राष्ट्रीयता या सभ्यता से जोड़ने के प्रयासों को खारिज करता है और जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराता है।
‘प्रहार’ में अलकायदा और आईएसआईएस जैसे संगठनों का उल्लेख है, जो वैश्विक स्तर पर स्लीपर सेल को सक्रिय कर सुरक्षा को चुनौती देते हैं। इसमें डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ रहे इस्तेमाल पर भी चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है, कि आतंकी घटनाओं में स्थानीय पुलिस की पहली प्रतिक्रिया सामने आएगी, जबकि प्रमुख अभियानों में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और जाँच में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी की भूमिका अहम होगी।
पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि हाल के दिनों में, गैर-कानूनी हथियार सिंडिकेट और आतंकवादी समूहों के बीच साठगांठ सामने आई है, और इससे निपटने के लिए अलग-अलग भारतीय राज्यों में इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ-साथ संबंधित सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मिलकर दखल दिया जा रहा है। डॉक्यूमेंट में भारतीय कानूनों के तहत कानूनी ढांचे के जरिये आतंकी फंडिंग नेटवर्क को बाधित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
गृह मंत्रालय ने साफ कहा है, कि कट्टरपंथी और आतंकी ग्रुप युवाओं को बरगलाकर उन्हें अपने संगठन में भर्ती करते हैं और फिर कट्टरता का पाठ पढ़ाते हैं। इसमें सामाजिक और धार्मिक नेताओं की भूमिका भी सामने आ रही है। कई एनजीओ और मॉडरेट प्रचारक इसके खिलाफ लोगों में जागरूकता फैला रहे हैं।

